बिक रहा है पानी, पवन बिक न जाए...कविता-
ग्राम-मुर्कोल, तहसील-वाड्रफनगर, जिला-बलरामपुर छत्तीसगढ़ से धनई पोर्ते एक कविता सुना रहे है, कहीं कफन बिक न जाए:
बिक रहा है पानी, पवन बिक न जाए-
बिक गई है धरती, गगन बिक न जाए-
चाँद पर भी बिकने लगी है जमीन-
डर है कि सूरज की तपन बिक न जाये-
हर जगह बिकने लगी है स्वार्थ नीति-
डर है कि कहीं शर्म बिक न जाये...
Posted on: Sep 02, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER
छत्तीसगढ़ की महिलाओ को सदियों से तथस्त...कविता-
जिला-राजनंदगांव, छतीसगढ़ से वीरेन्द्र गन्धर्व एक कविता सुना रहे है:
छत्तीसगढ़ की महिलाओ को सदियों से तथस्त-
शिलाओ को पति की लम्बी आयु के लिये रहती हरी ताली का तीज-
उनके दिलों में रोप दिया उपवास का बीज उपवास का बीज-
उनके दिलों में रूप दिया उपवास का बीज-
अन जल ग्रहण किये बिना उपवास करती साल एक बार-
पति को भी तो चाहिए जी भर के कर ले प्यार-
मनुष्य ही बनकर रहें, लांघे न दीवार-और लांघे न दहलीज-
पति की लम्बी आयु के लिए रहती हरी ताली का तीज-
स्वस्थ्य रहे और मस्त रहें बहना बेटी मई-
हरी ताली का तीज की बारम-बारम बार बधाई...
Posted on: Aug 28, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER
उठो नई किरण लिए जगा रही नई उषा...कविता-
ग्राम पंचायत-बाघनपाल, ब्लाक-लोहंडीगुडा, जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से सुखदाई कचलाम के साथ में कक्षा 11वीं की छात्रा कुमारी शांति मौर्य एक कविता सुना रहीं हैं:
उठो नई किरण लिए जगा रही नई उषा-
उठो उठो नई संदेश दे रही दिशा-दिशा-
खिले कमल और अरुण तरुण प्रभात मुस्कुरा रहा-
गगन विकास का नवीन साज है सजा रहा-
उठो चलो बढ़ो समीर शंख है बजा रहा-
भविष्य सामने खड़ा प्रशस्त पथ बना रहा...
Posted on: Aug 27, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER
देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखे...कविता-
ग्राम-रक्सा, पोस्ट-फुनगा, थाना-भालूमाड़ा, जिला-अनुपपुर (मध्यप्रदेश) से दिव्या एक कविता सुना रहीं है:
देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखे-
सूरज हमें रोशनी देता, हवा नया जीवन देती है-
भूख मिटाने को हम सब की, धरती पर होती खेती है-
औरों का भी हित हो जिससे, हम ऐसा कुछ करना सीखे-
देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखे-
देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखे-
गर्मी की तपती दोपहर में, पेड़ सदा देते हैं छाया-
सुमन सुगंध सदा देते हैं, हम सबको फूलों की माला-
त्यागी तरुओं के जीवन से, हम परहित कुछ करना सीखे-
देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखे-
देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखे-
जो अनपढ़ है उन्हें पढ़ाएं, जो चुप है उनको वाणी दे-
पिछड़ गए जो उन्हें बढ़ाए, समरसता का भाव जगा दे-
हम मेहनत के दीप जलाकर, नया उजाला करना सीखे-
देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखे...
Posted on: Aug 23, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER
बैठ जाती हूँ मिट्टी पे अक्सर...कविता-
पोस्ट-वीरेंद्र नगर ब्लाक-वाड्रफनगर, जिला-बलरामपुर छत्तीसगढ़ से रामधनी पोर्ते कविता सुना रहें है:
बैठ जाती हूँ मिट्टी पे अक्सर-
क्योकि मुझे अपनी औकात अच्छी लगती है-
मैंने समुदर से सिखा है जीने का तरीका-
चुपचाप से पहना और अपनी मौज में रहना-
चाहती तो हूँ के ये दुनिया बदल दूँ-
पर दो वक्त के रोटी के जुगाड़ में-
फुर्सत नहीं मिलती दोस्तों-
मंहगी से मंहगी घड़ी पहनकर देख ली-
वक्त फिर भी अपनी हिसाब से कभी नहीं चला-
यूं हि हम दिल को साफ रखा करते थे-
पता नहीं किस्मत चेहरों के होती है-
अगर बुरा नहीं है तो उसकी फ़िक्र क्यों-
अगर खुदा है तो फिक्र क्यों...
