बैठ जाती हूँ मिट्टी पे अक्सर...कविता-

पोस्ट-वीरेंद्र नगर ब्लाक-वाड्रफनगर, जिला-बलरामपुर छत्तीसगढ़ से रामधनी पोर्ते कविता सुना रहें है:
बैठ जाती हूँ मिट्टी पे अक्सर-
क्योकि मुझे अपनी औकात अच्छी लगती है-
मैंने समुदर से सिखा है जीने का तरीका-
चुपचाप से पहना और अपनी मौज में रहना-
चाहती तो हूँ के ये दुनिया बदल दूँ-
पर दो वक्त के रोटी के जुगाड़ में-
फुर्सत नहीं मिलती दोस्तों-
मंहगी से मंहगी घड़ी पहनकर देख ली-
वक्त फिर भी अपनी हिसाब से कभी नहीं चला-
यूं हि हम दिल को साफ रखा करते थे-
पता नहीं किस्मत चेहरों के होती है-
अगर बुरा नहीं है तो उसकी फ़िक्र क्यों-
अगर खुदा है तो फिक्र क्यों...

Posted on: Aug 22, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER