बिक रहा है पानी, पवन बिक न जाए...कविता-
ग्राम-मुर्कोल, तहसील-वाड्रफनगर, जिला-बलरामपुर छत्तीसगढ़ से धनई पोर्ते एक कविता सुना रहे है, कहीं कफन बिक न जाए:
बिक रहा है पानी, पवन बिक न जाए-
बिक गई है धरती, गगन बिक न जाए-
चाँद पर भी बिकने लगी है जमीन-
डर है कि सूरज की तपन बिक न जाये-
हर जगह बिकने लगी है स्वार्थ नीति-
डर है कि कहीं शर्म बिक न जाये...
