पाकिस्तान का जरा-जरा कांप उठेगा, हम भी धरती के लाल...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
पाकिस्तान का जरा-जरा कांप उठेगा, हम भी धरती के लाल-
नहीं डरेंगे उनसे हम, अपनी मर्यादा रखें हैं संभाल-
लोहा उनसे ले लेंगे, जो हमसे गद्दारी करते हैं-
नहीं छोड़ेंगे हम उनको जो हमसे जलते हैं-
दम ख़म हम मे भी है, चूड़ियां हम नहीं पहने हुए हैं-
सारी हेकड़ी तोड़ के रख देंगे, जो बुरी नज़र हम पे रखते हैं...

Posted on: May 08, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

अक्षय तृतीया के दिन महुआ, चावल, रोटी बनाकर, दीप जलाकर पूजा करते है-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी बता रहे हैं| आज अक्षय तृतीया है| आज का दिन किसान के लिये बड़ा ख़ास होता है| किसान अपने खेती के साधनो का पूजा करता है| महुआ, चावल, रोटी बनाकर, दीप जलाकर पूजा करता है| अच्छा फसल होने की कामना करते है| वट वृक्ष पर धागा बांधकर पति की रक्षा की कामना करते हैं | इस समय विवाह का अच्छा मुहूर्त रहता है|

Posted on: May 07, 2019. Tags: CG CULTURE KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

सूरज दादा सूरज दादा इतना न तड़पाओ न...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
सूरज दादा सूरज दादा इतना न तड़पाओ न-
तपकर धरती जल रही है, कुछ तो नरमी खाओ न-
सूख रही है ताल तलैया, पानी को गरमाओ न-
गर्मी से रो रहे बच्चे हमारे, उनपे तरस खाओ न-
पशु पक्षी तड़प रहे हैं, कुछ तो समझ दिखाओ न-
सूरज दादा सूरज दादा इतना न तड़पाओ न...

Posted on: May 07, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

ये भी धोखा वो भी धोखा, जीवन ही एक धोखा है...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
ये भी धोखा वो भी धोखा, जीवन ही एक धोखा है-
संभल संभल कर जीना सीखो, धोखा को क्या कोई रोका है-
जीना यहाँ सबको यही है, मरना भी है सबको-
लेकर कुछ जाना नहीं, सोचना समझना है उसको-
देर किये तो पछताओगे, जल्दी भी है क्यों इतनी-
फुर्सत से सोचो समझो, जाना है दूर कितनी...

Posted on: May 07, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIPUR SONG VICTIMS REGISTER

आज किचन में हो रहा, मूली कोचई की सगाई...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
आज किचन में हो रहा, मूली कोचई की सगाई-
कददू भिंडी देख रहे थे, उनका मन भी ललचाई-
बैगन लम्बी छलांग लगाई, उनके पास जा गिर पड़ी-
मिर्च दौड़कर उसे संभाला, बैगन फूट-फूट कर रो पड़ी-
तेल खुशी से छलक पड़ा, हल्दी ताली जोर की बजाई-
प्याज दुबककर रो रहा था, लहसुन ने उसको समझाई...

Posted on: May 07, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

« View Newer Reports

View Older Reports »