सूरज दादा सूरज दादा इतना न तड़पाओ न...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
सूरज दादा सूरज दादा इतना न तड़पाओ न-
तपकर धरती जल रही है, कुछ तो नरमी खाओ न-
सूख रही है ताल तलैया, पानी को गरमाओ न-
गर्मी से रो रहे बच्चे हमारे, उनपे तरस खाओ न-
पशु पक्षी तड़प रहे हैं, कुछ तो समझ दिखाओ न-
सूरज दादा सूरज दादा इतना न तड़पाओ न...
