आज हम प्रेम और विश्वास के गीत गुनगुनाएंगे...नागासाकी पर कविता
कानपुर, उत्तरप्रदेश से के. एम. भाई एक कविता प्रस्तुत कर रहे हैं. आज के ही दिन नागासाकी (जापान) में परमाणु बम गिराया गया था जिसमें बहुत लोगों की जाने गई थीं. कविता उसी सन्दर्भ में है :
इंसानियत की दहलीज पर हम नए रास्ते बनाएंगे-
शंकाओं की जमीन पर हम उम्मीदों के बीज उगाएंगे-
नागाशाकी की याद में एक नया जहाँ बसाएँगे-
भूलकर अतीत के अन्धकार को,
हम वर्तमान का एक नया सबेरा सजाएंगे-
कल हो या ना हो-
आज हम प्रेम और विश्वास के गीत गुनगुनाएंगे-
हथियारों की शेज पर फूलों का गुलदस्ता सजाएंगे-
नफरत की इस आग से प्रेम की ज्योति जलाएंगे-
आतंकी जख्मों पर हम दोस्ती का मरहम लगाएंगे-
चीखती आवाजों पर हम सरगम के नये सुर बनाएंगे...
Posted on: Aug 10, 2015. Tags: KM Bhai SONG VICTIMS REGISTER
आजाद तो आजाद हो गया, पर मेरा देश गुलाम रह गया...कविता
कानपुर, उत्तरप्रदेश से के.एम. भाई चंद्रशेखर आजाद की 109 वीं जयन्ती के अवसर पर एक कविता प्रस्तुत कर रहे हैं:
आजाद तो आजाद हो गया, पर मेरा देश गुलाम रह गया-
गोरों का तो पत्ता साफ हो गया, पर कालों का काला साम्राज्य हो गया-
वो तो आजादी का सूरज दिखा गया, वतन तो अब भ्रष्टाचार का गुलाम हो गया-
आजादी का दीवाना, भरी जवानी में कुर्बान हो गया-
पर 67 साल का बूढ़ा फिर से गुलाम हो गया-
अशफाक- बिस्मिल का वो साथी वतन-ए-खाक हो गया-
पर मेरा देश लुटेरों का शिकार हो गया-
आजाद तो आजाद हो गया, पर मेरा देश गुलाम रह रह गया.
Posted on: Jul 24, 2015. Tags: KM Bhai SONG VICTIMS REGISTER
गूगों के देश में भी क्या कोई गीत गुनगुनाएगा...आपातकाल पर कविता
कानपुर, उत्तरप्रदेश से के एम भाई 25 जून 1975 को देश में लगे आपातकाल की 40 वीं बरसी पर एक कविता प्रस्तुत कर रहे हैं:
गूगों के देश में भी क्या कोई गीत गुनगुनाएगा-
जिन्दगी के अक्स में क्या कोई सपने बनाएगा-
महफ़िल-ए-गुर्बत आज इस फ़िराक में है-
कि तेरे शहर में क्या कोई चिराग जलाएगा-
उन्हें लगता है मकतल में आज-
अँधेरा फिर जीत जाएगा-
दरकती दीवारों से आवाजें उठती हैं-
कि तेरे शहर में क्या कोई इन्कलाब आएगा...
Posted on: Jun 27, 2015. Tags: KM Bhai SONG VICTIMS REGISTER
सुन ले ताज ए बर्तानिया...कविता
के एम भाई कानपुर (उ.प्र.) से एक कविता सुना रहे हैं, जो आतंकवाद के ऊपर आधारित हैं :
सुन ले ताज ए बर्तानिया-
आतंक की गलियों से आवाजें उठती हैं-
खून से सराबोर इस धरती पे-
एक दिन ऐसा आयेगा-
जब सब्जी की जगह इंसा बेचा जाएगा-
न मुल्क रहेगा न सिपहसलार रहेगा-
सुन ले ताजे ए बर्तानिया-
तेरे कद्रदानों के हाथों ही-
तेरा जनाजा निकाला जायेगा-
दस्तावेज ए मुल्क से-
आतंकवाद का नामो निशां मिट जाएगा-
आतंकवाद का नामो निशां मिट जाएगा...
Posted on: Jun 11, 2015. Tags: KM BHAI SONG VICTIMS REGISTER
दस्ताने मुल्क क्या सुनाएं तुम्हें...कविता
उतरप्रदेश कानपुर से के एम भाई करुणा शानबाग के जन्मदिन पर अपनी एक कविता के माध्यम से श्रधांजलि दे रहे है:
दस्ताने मुल्क क्या सुनाएं तुम्हें-
दस्ताने मुल्क क्या सुनाएं तुम्हें-
अब तो भेड़ियाँ भी चिल्लाती है-
मेरे इन आखों से आंसू की जगह-
लहू कि कतारें बह जाती है-
दुपट्टे का रंग बताता है-
मेरे जिस्म कि कहानी-
दर्द से ज्यादा तकलीफदेह होती है-
लोकतंत्र कि नाजायज जवानी-
भूख नहीं मरती है,मुझे पर तेरे-
नंगे समाज को देखकर मेरी सांसे उखड़ जाती है-
मौत से ये जिंदगी डरती है-
मौत से ज्यादा ये जिंदगी डरती है...
