भईया बटोगे तो कटोगे, वोट न दोगे तो कटोगे..कविता
नमस्कार साथियों, मैं कानपुर से के एम भाई बोल रहा हूँ। अभी उत्तरप्रदेश में कुछ जगहों पर उपचुनाव होने वाले हैं जिस पर यहाँ के मुख्यमंत्री ने एक नारा दिया है बँटोगे तो कटोगे, इस नारे पर एक कविता:
बुलडोजर वाले बाबा,
का चुनाव वाला वादा,
भईया बटोगे तो कटोगे,
वोट न दोगे तो कटोगे,
रोटी न मिलेगा,
न दवा मिलेगा,
न्याय मांगोगे,
तो जेल में सड़ोगे,
वोट न दोगे तो कटोगे ..
भईया बटोगे तो कटोगे ..
हर गली हर चौराहे,
पर कौड़ियों में बिकोगे,
रात हो या दिन,
यूं ही सरेआम तड़पोगे,
वोट न दोगे तो कटोगे ..
भईया बटोगे तो कटोगे ..
के एम भाई
Posted on: Nov 02, 2024. Tags: KM Bhai Poem
इधर भी तुम उधर भी तुम...कविता-
कानपुर उत्तर प्रदेश से के एम भाई एक कविता सुना रहे हैं:
इधर भी तुम उधर भी तुम-
हर तरफ तुम ही तुम-
मंदिर में भी तुम-
मस्जिद में भी तुम-
हनुमान भी तुम्हारे राम भी तुम्हारे-
अब रहमो रहीम भी तुम्हारे...
Posted on: Jun 27, 2023. Tags: KANPUR KM BHAI POEM UP
आप महजिद तोड़ते हो आप मडर से खत्म करते हो...कविता
के एम भाई, कानपुर उत्तर प्रदेश से एक कविता सुना रहे हैं:
आप महजिद तोड़ते हो आप मडर से खत्म करते हो
आप हमारे रतम रिवाजों को जिहात बोलते हो बेसक आप हमारे महजीद गिरा सकते हो लेकिन हमारे खुदा को नहीं गिरा सकते हो...
Posted on: Sep 21, 2022. Tags: BHAI KANPUR KM PEAM UP
शहीद भगत सिंह की याद में...कविता-
कानपुर से केएम भाई एक कविता सुना रहे है जो 114वी जयंती पर शहीदे-ए-आजम को शत शत नमन करते हुये सुना रहे है :
शहीद भगत सिंह की याद में-
न आंसू हैं न है ख़ुशी-
न जश्न है न शोक-
हर लफ्ज़-
आज है खामोश…
इंकलाब का-
वो चेहरा-
आज बन गया-
है एक कोष...
न रंग है न है जोश-
न फ़िक्र है न रोष-
वतन का-
वो मतवाला-
आज हो-
गया है बेहोश....
न तप है न तपिश-
न शौर्य है न कशिश-
आजाद बिस्मिल का-
वो सरफ़रोश-
आज हो-
गया है एक पोज़.....
न गुलामी है न है ब्रिटिश-
न रंज है न है सितम-
पंजाब का-
वो भगत-
आज बन गया है-
यादों का एक कोष ...
Posted on: Sep 29, 2021. Tags: KANPUR KM BHAI POEM UP
जो अक्सर अंधेरे के साये मे रहती है...कविता-
कानपुर से के एम भाई अंतर्राष्टीय महिला दिवस के उपलक्ष में एक कविता सुना रहे है :
जो अक्सर अंधेरे की साये में रहती है-
मैंने देखा है ऊँ आँखों को-
जो कभी आंसुओ से भीग जाती है-
तो जो कभी पहर सी ठहर सी जाती है-
जो सदियों से एक पलक भी नहीं झपकी-
जो कभी एकांत में सिसक जाती है...
