आज हम प्रेम और विश्वास के गीत गुनगुनाएंगे...नागासाकी पर कविता
कानपुर, उत्तरप्रदेश से के. एम. भाई एक कविता प्रस्तुत कर रहे हैं. आज के ही दिन नागासाकी (जापान) में परमाणु बम गिराया गया था जिसमें बहुत लोगों की जाने गई थीं. कविता उसी सन्दर्भ में है :
इंसानियत की दहलीज पर हम नए रास्ते बनाएंगे-
शंकाओं की जमीन पर हम उम्मीदों के बीज उगाएंगे-
नागाशाकी की याद में एक नया जहाँ बसाएँगे-
भूलकर अतीत के अन्धकार को,
हम वर्तमान का एक नया सबेरा सजाएंगे-
कल हो या ना हो-
आज हम प्रेम और विश्वास के गीत गुनगुनाएंगे-
हथियारों की शेज पर फूलों का गुलदस्ता सजाएंगे-
नफरत की इस आग से प्रेम की ज्योति जलाएंगे-
आतंकी जख्मों पर हम दोस्ती का मरहम लगाएंगे-
चीखती आवाजों पर हम सरगम के नये सुर बनाएंगे...
