आजाद तो आजाद हो गया, पर मेरा देश गुलाम रह गया...कविता
कानपुर, उत्तरप्रदेश से के.एम. भाई चंद्रशेखर आजाद की 109 वीं जयन्ती के अवसर पर एक कविता प्रस्तुत कर रहे हैं:
आजाद तो आजाद हो गया, पर मेरा देश गुलाम रह गया-
गोरों का तो पत्ता साफ हो गया, पर कालों का काला साम्राज्य हो गया-
वो तो आजादी का सूरज दिखा गया, वतन तो अब भ्रष्टाचार का गुलाम हो गया-
आजादी का दीवाना, भरी जवानी में कुर्बान हो गया-
पर 67 साल का बूढ़ा फिर से गुलाम हो गया-
अशफाक- बिस्मिल का वो साथी वतन-ए-खाक हो गया-
पर मेरा देश लुटेरों का शिकार हो गया-
आजाद तो आजाद हो गया, पर मेरा देश गुलाम रह रह गया.
