गूगों के देश में भी क्या कोई गीत गुनगुनाएगा...आपातकाल पर कविता
कानपुर, उत्तरप्रदेश से के एम भाई 25 जून 1975 को देश में लगे आपातकाल की 40 वीं बरसी पर एक कविता प्रस्तुत कर रहे हैं:
गूगों के देश में भी क्या कोई गीत गुनगुनाएगा-
जिन्दगी के अक्स में क्या कोई सपने बनाएगा-
महफ़िल-ए-गुर्बत आज इस फ़िराक में है-
कि तेरे शहर में क्या कोई चिराग जलाएगा-
उन्हें लगता है मकतल में आज-
अँधेरा फिर जीत जाएगा-
दरकती दीवारों से आवाजें उठती हैं-
कि तेरे शहर में क्या कोई इन्कलाब आएगा...
