मिश्री से भी मीठी वह मेरी हिंदी भाषा है...कविता-
ग्राम-करकट्टा, पोस्ट-जोगा, थाना-उटारीरोड, जिला-पलामू (झारखंड) से अंजनी कुमारी एक कविता सुना रहीं हैं-
मिश्री से भी मीठी वह मेरी हिंदी भाषा है-
दिल से दिल को जोड़े जो जिसे जुडी हर आशा हैं-
अंग्रेजी भी पढ़ती हूँ मैं पर लगे ना मेरा उसमे ध्यान-
हिंदी ही मेरा पहचान हिंदी ही मेरा मुस्कान-
जो भूल रहें हैं उस भाषा को होती बड़ी निराशा है-
मिश्री से भी मीठी वह मेरी हिंदी भाषा है...RK
Posted on: Sep 15, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER
हिम्मत करने वालों की हार नहीं होती...रचना-
बडवानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार एक रचना सुना रहें हैं-
हिम्मत करने वालों की हार नहीं होती-
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती-
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है-
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है-
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है-
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है-
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती-
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती-
डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है-
जा जाकर खाली हाथ लौटकर आता है-
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में-
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में-
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती-
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती-
असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो-
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो-
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम-
संघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो तुम-
कुछ किये बिना ही जय जयकार नहीं होती-
हिम्मत करने वालों की हार नहीं होती...RK
Posted on: Sep 15, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER
कुत्ते को घुमाना याद रहा- गाय की रोटी भूल गये...पंक्ति-
बडवानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार वर्तमान इन्सान के बारे में दो लाइन पंक्ति सुना रहें हैं-
कुत्ते को घुमाना याद रहा-
गाय की रोटी भूल गये-
ब्यूटीपालर याद रहा-
अब लम्बें चोटी भूल गयें-
फ़्रिज का पानी तो याद रहा-
पानी का मटका भूल गयें-
बोतल और पाऊज याद रहा-
प्याऊ का पानी याद रहा-
टी.व्ही.सीरियल याद रहा-
दादी की कहानी भूल गयें-
Posted on: Sep 14, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER
कसम है तुम्हें देश के नवजवानों...कविता-
वेंकट नगर, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से शांतनु पण्डे एक कविता सुना रहे हैं:
कसम है तुम्हें देश के नवजवानों-
भारत की यह शान न जाने पाये-
न हम चाहते है खंजर उठाये-
न हम चाहते हैं खून की नदियाँ बहायें-
मिली है जो आजादी हमको उसे कोई मिटाने न पाये...
Posted on: Sep 14, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER
एक माँ के दो बच्चे थे सूरज चंदा नाम...कविता-
राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से वीरेंद्र गंधर्व एक कविता सुना रहे हैं:
एक माँ के दो बच्चे थे सूरज चंदा नाम-
बड़े जतन से पाला उसको सहके कष्ट तमाम-
एक दफे गाँव में उनके भीषण पड़ा अकाल-
वृद्ध अपने घरो में रहते, काम करते बाल गोपाल-
मालिक ने एक दिन सूरज चंदा को अपने घर बुलाया-
दोपहर से शाम तक उनसे सारा काम कराया... (AR)
