एक शेर था वन में बुढा हुआ ना : कविता-
ग्राम-रकसा, पोस्ट-फुनगा, थाना-भालुमाड़ा, जिला-अनुपपुर (मध्यप्रदेश) दिव्या जोगी एक कविता सुना रही हैं:
एक शेर था वन में बुढा हुआ ना-
पल कुछ चलने में थक जाता था-
भोजन भी ना कभी नही पाता था-
एक समय तलाब किनारें घूम रहा था-
दुःख के मारें मिला उसे सोना का कंगन-
हुआ खुश मन ही मन बैठ गया वही घूम घूम...
Posted on: May 22, 2021. Tags: ANUPPUR DIVYA JOGI MP POEM
पाईप लाइन का काम पूरा नहीं हुआ जिससे बरसात में बह गया है...
पाईक पारा, बड़ेकिलेपाल, ब्लाक-बास्तानार, जिला-बस्तर, छत्तीसगढ़ से जमुनी ठाकुर बता रही हैं, गाँव में पानी की समस्या है, पाइपलाइन बिछाया गया था लेकिन बरसात के समय बह गया है, उसके बाद से कोई काम नहीं हुआ है| इस संबंध में सरपंच, सचिव के पास निवेदन किये थे लेकिन काम नहीं हो रहा है इसलिये वे सीजीनेट के श्रोताओं से निवेदन कर रहे हैं कि दिये नंबरों पर संपर्क कर पानी की समस्या का निराकरण कराने में मदद करें: सरपंच@6268036669, CEO@9406016762, कलेक्टर@8458956694, PHE@07782222224. (187354)
Posted on: May 22, 2021. Tags: BSTAR PROBLEM CG GUHAR JAMUNI THAKUR PHE WATER
स्वास्थ्य स्वर : गुदाभ्रंश का घरेलु उपचार-
प्रयाग विहार, मोतीनगर, रायपुर (छत्तीसगढ़) से वैद्य एच डी गाँधी गुदाभ्रंश का घरेलु उपचार बता रहे हैं, जाम या अमरुद, कुटज की छाल 50 ग्राम, जड़ 50 ग्राम, पत्ते 50 ग्राम | सबको कूट पीस कर 250 ग्राम पानी में उबाले जब पानी आधा बच जाये तब लेट्रिंग के जगह में बार बार लगायें| लगातार 21 दिन तक करने से लाभ हो सकता है| मिर्च, मसाला, तेल, खटाई, मैदा, शक्कर नमक का सेवन कम करें| नशा न करें| अधिक जानकारी के लिये संपर्क कर सकते हैं : संपर्क नंबर@9111061399.
Posted on: May 22, 2021. Tags: CG HD GADHI HEALTH RAIPUR
15 साल से बीमारी दूर करने के लिये दवा देते हैं...
ग्राम-ककनार, ब्लाक-दरभा, जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से समरराम बघेल बता रहे हैं वे छाती दर्द, पेट दर्द शरीर दर्द, सांप काटे का दवा देते हैं 15 साल से दवा दे रहे हैं उनके पास लोग दवा लेने आते हैं और लाभ लेते हैं, दिये नंबर पर बात कर इनसे जानकारी ले सकते हैं : संपर्क नंबर@6264044495.
Posted on: May 21, 2021. Tags: BASTAR CG DARBHA HEALTH SARASRAM BAGHEL
भारत माता के बेटे हम चलते सीना तान के...कविता-
ग्राम पंचायत-रेमावंड, जिला-नरायणपुर (छत्तीसगढ़) से सुशीला, गरिमा और सिखा एक कविता सुना रहे हैं:
भारत माता के बेटे हम चलते सीना तान के-
धर्म अलग हो जाति अलग हो वर्ग अगल हो भाषायें-
पर्वत सागर तन-वन मरुस्थल, मैदानों से हम आयें-
फौजी वर्दी में हम सबसे पहले हिन्दुस्तान के-
हिंदुस्तान की जिस मिट्टी पर हम सब खेले खाए हैं-
जिस राज्य को हम ममता क्षमता से अपनाये हैं-
भारत माता के बेटे हम चलते सीना तान के...
