मुझे तुम इतना जगह दे दो कि मेरा चार पाई तो बिछ जाये...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
मुझे तुम इतना जगह दे दो कि मेरा चार पाई तो बिछ जाये-
मुझे तुम इतना अन्न दे दो कि मेरा दिन गुजर जाये-
मुझे इतना कपड़ा दे दो कि मेरा तन ढक जाये-
क्या लेकर आया है, क्या लेकर यहां से जाना है-
मुठ्ठी बांध के आया है, हांथ पसारे जायेगा-
तन कपड़ा भी तेरा साथ नहीं, फिर बईमानी लूट पाट क्या करना है...

Posted on: Mar 10, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

मन भौरा रे मन भौरा रे, वो मन भौरा तू भुला गया...कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहा है :
मन भौरा रे मन भौरा रे-
वो मन भौरा तू भुला गया-
फूलों को छोड़ काटों में झूल गया-
तेरा मंजिल और था-
कहाँ जाके रास्ता भूल गया-
तुझे कहाँ जाना था, कहाँ जाके फंस गया
क्या पाया क्या खोया, क्या इसका हिसाब लगाया...

Posted on: Feb 19, 2019. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER

जंगल में आमसभा...कविता

ग्राम-भाटाचौक, ब्लाक-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक स्वरचित रचना सुना रहे हैं, जिसका शीर्षक है जंगल में आमसभा:
सामाजिक असंतुलन को संतुलन बनाए रखने के लिए-
पशुओ में एक आमसभा बुलाई गई जिसका कार्यभार-
बन्दर मामा को सौंपा गया सारे पशु आ आकर एकत्रित हुए-
सबको बंदर मामा ने अपने-अपने स्थान पर बैठाया-
उसी समय पर जंगल का राजा शेर अपने दल के साथ आया-
उसके आगमन पर सारे पशु उसके स्वागत के लिए उठ खड़े हुए...

Posted on: Feb 16, 2019. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER

किल-किल वकील डॉक्टर देखे दिल...व्यंग्य रचना

ब्लाक-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक व्यंग्य रचना सुना रहे हैं:
किल-किल वकील डॉक्टर देखे दिल-
मेडिकल बनाए बिल तो मैं गया हिल-
कई सील टूट गए कई बिल ख़राब-
जब से उद्योगपति आया सब कुछ हुआ बर्बाद-
माँ बहन बिक गए हरियाली हुआ विनाश-
गाँव-गाँव उजड़ गया उद्योगपतियों का हुआ राज...

Posted on: Feb 15, 2019. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER

खेती हमर सार, बाकी दुनियादारी बेकार...छत्तीसगढ़ी भाषा में किसानी पर कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक छत्तीसगढ़ी भाषा में किसानी के बारे में कविता सुना रहे हैं :
चल जाबो गा संघी खेत खार-
सोना सही धान पके हवे, ऊपर मुड़ा नाथ-
पसिया ला धर लूबो दिन भर-
करपा-करपा कर, दुई दिन सुखाबो-
पैरा डोर मा बांधाबो, बैला-भैसा गड़ी मा आनबो-
कोठार मा खरी गांजबो-
बैल ला बगराबो दाई बेलन फांदबो...

Posted on: Sep 30, 2018. Tags: AGRICULTURE CG CHHATTISGARHI KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

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