सागर दिवस...
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व सागर दिवस के बारे में बता रहे है:
सागर को समुद्र कहा जाता है अरावास नेर निधि रत्नाकार जो की सारी नदी इसमें समाती है तो इसे नदीस भी कहा जाता है समुद्र बहुमूल्य है संसार के लिये क्यूंकि नमक है तो संसार है और समुद्र है तो संसार क्यूंकि समुद्र में जो खारा पानी होता है वही नमक को जन्म देता हैऔर समुद्र मौसम को भी निर्धारित करता है समुद्र में तरह तरह के जीव जन्तु होते है मोती भी तो समुद्र में होते हैं | (AR)
Posted on: Jun 08, 2021. Tags: CG RAJNANDGAON STORY VIRENDRA GANDHARV
धरती को नचाना है समतल को भी नचाना है...गीत-
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व एक पर्यावरण पर गीत सुना रहे है , जिसका बोल है ” | धरती को नचाना है समतल को भी नचाना है ” | अपने संदेश गीत संगीत रिकार्ड करने के लिये दिये नंबर 08050068000 पर संपर्क कर सकते हैं|
Posted on: Jun 07, 2021. Tags: CG RAJNANDGAON SONG VIRENDRA GANDHARV
मजदूरों की पद यात्रा रस्ते में ही थम गई...कविता -
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व एक कविता सुना रहे हैं:
मजदूरों की पद यात्रा रस्ते में ही थम गई-
असमा सहम गई धरती भी सहम गई-
पटरियों पर सोने की इन्होने की नादानी-
नींद में ही ख़त्म हो गई उनकी कर्म कहानी-
मजदूर ही समस्याओं से दो चार होते है-
किसी न किसी बहाने हादसे बार बार होते हैं... (AR)
Posted on: Jun 06, 2021. Tags: CG RAJNANDGAON SONG VIRENDRA GANDHARV
सुविचार : संतोष ही सबसे बड़ा सुख है...
राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ से विरेन्द्र गंधर्व सुविचार सुना रहे है :
मन क्रम वचन से किसी को हनी पहुंचाना पाप है-
आवश्यकता से अधिक घर में वस्तुओ का संग्रह करना पाप है-
संतोष ही सबसे बड़ा सुख है...
Posted on: May 28, 2021. Tags: CG RAJNANDGAON VIRENDRA GANDHARV
बस यही अपराध मैं हर बार करता हूँ...गीत-
राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ से वीरेंद्र गंधर्व बुध पूर्णिमा के अवसर पर संदेस देते हुये एक गीत सुना रहे हैं:
बस यही अपराध मैं हर बार करता हूँ-
आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ-
एक खिलौना बन गया दुनिया के मेले में-
कोई खेले भीड़ में कोई अकेले में-
मुस्कुरा कर भेंट हर स्वीकार करता हूँ... (AR)
