मजदूरों की पद यात्रा रस्ते में ही थम गई...कविता -
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व एक कविता सुना रहे हैं:
मजदूरों की पद यात्रा रस्ते में ही थम गई-
असमा सहम गई धरती भी सहम गई-
पटरियों पर सोने की इन्होने की नादानी-
नींद में ही ख़त्म हो गई उनकी कर्म कहानी-
मजदूर ही समस्याओं से दो चार होते है-
किसी न किसी बहाने हादसे बार बार होते हैं... (AR)
