कश्मीर हमारी है, हमारा ही रहेगा...कविता- Edited
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
कश्मीर हमारी है, हमारा ही रहेगा-
पाकिस्तानी कुछ भी कर लो, तुम्हारा नहीं चलेगा-
शर्म नहीं आता यहां सुवर के बच्चे भेजते हैं-
भून कर रख देंगे जो हमसे लोहा लेते हैं-
कुछ तोह शर्म करो, हम तुम्हारे पडोसी है-
पडोसी ही पडोसी का मदद करता है...
Posted on: May 08, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
माँ मुझे भी एक लाठी दे दो, आगे को बढ़ जाऊंगा...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
माँ मुझे भी एक लाठी दे दो, आगे को बढ़ जाऊंगा-
सरहद पर जा कर आतंकियों को मार भगाऊंगा-
डटा रहूँगा जब तक, उन्हें मार न गिराऊं-
गिन गिन कर बदला लूंगा उनसे-
उनके लहु से अपना प्यास बुझाऊँ-
वो हत्यारे आँख दिखाते, उनसे लोहा डटकर लेना है-
उनके बुरे मनसूबो को, पानी पानी कर देना है...
Posted on: May 08, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
पाकिस्तान का जरा-जरा कांप उठेगा, हम भी धरती के लाल...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
पाकिस्तान का जरा-जरा कांप उठेगा, हम भी धरती के लाल-
नहीं डरेंगे उनसे हम, अपनी मर्यादा रखें हैं संभाल-
लोहा उनसे ले लेंगे, जो हमसे गद्दारी करते हैं-
नहीं छोड़ेंगे हम उनको जो हमसे जलते हैं-
दम ख़म हम मे भी है, चूड़ियां हम नहीं पहने हुए हैं-
सारी हेकड़ी तोड़ के रख देंगे, जो बुरी नज़र हम पे रखते हैं...
Posted on: May 08, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
अक्षय तृतीया के दिन महुआ, चावल, रोटी बनाकर, दीप जलाकर पूजा करते है-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी बता रहे हैं| आज अक्षय तृतीया है| आज का दिन किसान के लिये बड़ा ख़ास होता है| किसान अपने खेती के साधनो का पूजा करता है| महुआ, चावल, रोटी बनाकर, दीप जलाकर पूजा करता है| अच्छा फसल होने की कामना करते है| वट वृक्ष पर धागा बांधकर पति की रक्षा की कामना करते हैं | इस समय विवाह का अच्छा मुहूर्त रहता है|
Posted on: May 07, 2019. Tags: CG CULTURE KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
सूरज दादा सूरज दादा इतना न तड़पाओ न...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
सूरज दादा सूरज दादा इतना न तड़पाओ न-
तपकर धरती जल रही है, कुछ तो नरमी खाओ न-
सूख रही है ताल तलैया, पानी को गरमाओ न-
गर्मी से रो रहे बच्चे हमारे, उनपे तरस खाओ न-
पशु पक्षी तड़प रहे हैं, कुछ तो समझ दिखाओ न-
सूरज दादा सूरज दादा इतना न तड़पाओ न...
