बना बनाकर चित्र सलोने...कविता-

ग्राम-कुटली, जिला, चित्रकूट, उत्तरप्रदेश से गुरुप्रसाद एक कविता सुना रहे हैं, जिसके बोल है, “बना बनाकर चित्र सलोने” | अपने संदेश रिकॉर्ड करने के लिये 08050068000 पर मिस्ड कॉल कर सकते हैं|

Posted on: Mar 09, 2021. Tags: CHITRAKOOT GURU PRASAD POEM UP

नर हो ना निराश करो मन को...कविता-

जिला-विदिशा, राज्य-मध्यप्रदेश से अजय कुमार मांझी कविता सुना रहें हैं:
नर हो ना निराश करो मन को-
कुछ काम करो कुछ काम करो-
जग में रह कर कुछ नाम करो-
जो जन्म हुवा वो व्यार्थ ना हो-
जिस्म यह व्यार्थ ना हो-
नर हो ना निराश करो मन को...(ID(182254)

Posted on: Mar 09, 2021. Tags: AJAY KUMAR MANJHI MP POEM VIDISHA

जल जंगल प्यारी- जन जन को मिले पर्यावरण शिक्षा...कविता-

ग्राम-दम्कसा, जिला-कांकेर(छ्त्तीसगढ़), हमें एक बुजुर्ग मिले जिन्होंने बगीचा में कई तरह के पेड़ पौधे, वनस्पती उगाई हुई है| वो कविता भी लिखते हैं उन्होंने बोर्ड पर कविता लिख बगीचे में लगे हें है| आइये पढ़ते हैं उनकी कविता-
जल जंगल प्यारी-
जन जन को मिले पर्यावरण शिक्षा-
पेड़ पौधे करें वन की रक्षा-
पशु पक्षी जीव जगत मानव हितकारी-
पेड़ पौधे वनस्पति जल जंगल प्यारी-
नवपल्लवित पेड़ पौधे नवपल्लवित पेड़ पौधे-
पेड़ पौधों की हरियाली से युक्त-
प्रकृति और पर्यावरण रहे प्रदूषण मुक्त-
पेड़ पौधे बढें, बने छायादार महल-
मिलेगी शुद्ध हवा, रहेंगे हरे भरे जंगल-
पेड़ पौधे जल जंगल अभिनन्दन करें-
प्रकृति नित नव रूप धरे-
ज्योति रूप सुरे चाँद तारे-
धरती माँ का गोद भरे-
अनंत रूप जग सारे न्यारे-
लता तरुवर स्वागत करते-
पक्षी जगत गुणगान करते-
कोटि कोटि हम नमन करे-
बंधन और अभिनन्दन करें-
प्रकृति की लीला अपरम्पार-
उसे प्रणाम मेरा बारम्बार...(185744)

Posted on: Mar 09, 2021. Tags: CG KANKER PRYAVARN POEM SHERSINH ACHALA

दुर्बल को न सताइये, जाकी मोटी हाय...दोहा

राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ से वीरेंद्र गंधर्व कबीरदास के दोहे के माध्यम से बता रहे हैं कि दुर्बल को नहीं सताना चाहिये, इससे उसकी हाय लगती है|
दुर्बल को न सताइये, जाकी मोटी हाय-
बिना जीव की श्वास से, लोह भस्म हो जाय...

Posted on: Mar 09, 2021. Tags: CG POEM RAJNANDGAON VIRENDRA GANDHARV

जो अक्सर अंधेरे के साये मे रहती है...कविता-

कानपुर से के एम भाई अंतर्राष्टीय महिला दिवस के उपलक्ष में एक कविता सुना रहे है :
जो अक्सर अंधेरे की साये में रहती है-
मैंने देखा है ऊँ आँखों को-
जो कभी आंसुओ से भीग जाती है-
तो जो कभी पहर सी ठहर सी जाती है-
जो सदियों से एक पलक भी नहीं झपकी-
जो कभी एकांत में सिसक जाती है...

Posted on: Mar 08, 2021. Tags: KANPUR KM BHAI POEM UP

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