माँ ने मुझको ममता दी, पिता ने दिया प्यार...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
माँ ने मुझको ममता दी, पिता ने दिया प्यार-
बहन राखी बांध दी, लुटाई अपना निश्छल प्यार-
भूल गया मै अपना सब कुछ-
पा अपनो का प्रेम प्यार-
दुनिया को मै भूल चला फीका-फीका लगा संसार...
Posted on: May 10, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
जग में सुंदर है दो नाम, मात पिता और उनका धाम...कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
जग में सुंदर है दो नाम, मात पिता और उनका धाम-
एक जन्म देती सब दुःख सहकर-
दूजा पालता अपना ख़ून पसीना सींच कर-
उनसे बढ़ कर नहीं कोई दूजा-
मात पिता की सेवा ही पूजा-
मात पिता को जो धुत्कारे, उससे बड़ा कोई नहीं हत्यारे...
Posted on: May 10, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
कूक रही थी कोयल काली पेड़ो पे डाली-डाली-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
कूक रही थी कोयल काली पेड़ो पे डाली-डाली-
झूम रही थी डाली के संग, होकर मस्त मतवाली-
तान दे रहा था सुर मिलाकर उड़ इस डाली से उस डाली-
कूक रही थी कोयल काली पेड़ो पे डाली-डाली-
दूर देश से आई थी एक महुआ आमा की खुशियाली-
चहक रही थी इधर उधर हवा के संग-संग...
Posted on: May 10, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
हंसी गयी, खुशी गया, गया मन का उमंग...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
हंसी गयी, खुशी गया, गया मन का उमंग-
देख बुढ़ापा की परछाई, मन का गया ठसन-
आया याद ऊस दिन का, जब था वो यंग-
खूब इतराया जग में, अपने बल बाजू के संग-
नहीं डरा नहीं झुका चलता रहा वो निडर-
देख बुढ़ापा की परछाई, होने लगा कुछ-कुछ डर...
Posted on: May 09, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
सूरज आज बरसा रही है अपना सारी आग...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
सूरज आज बरसा रही है अपना सारी आग-
इतने दिनो सो रहा था, मनो गया है आज जाग-
लगता है जला डालेगा, धरती का कोना कोना-
नहीं छोड़ेगा शायद एक भी सुंदर सलोना-
नदी, नाला, ताल, तलईया, सबको सुखा कर ही मानेगा-
जीव, जन्तु सभी को रुला कर ही मानेगा...
