कूक रही थी कोयल काली पेड़ो पे डाली-डाली-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
कूक रही थी कोयल काली पेड़ो पे डाली-डाली-
झूम रही थी डाली के संग, होकर मस्त मतवाली-
तान दे रहा था सुर मिलाकर उड़ इस डाली से उस डाली-
कूक रही थी कोयल काली पेड़ो पे डाली-डाली-
दूर देश से आई थी एक महुआ आमा की खुशियाली-
चहक रही थी इधर उधर हवा के संग-संग...
