तुम तो ठेहरे मृत्यु लोक में, अमर लोक को कब जाओगे...भजन गीत
ग्राम-रामनगर, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से कुमारी शांति एक भजन गीत सुना रही है:
तुम तो ठेहरे मृत्यु लोक में अमर लोक को कब जाओगे-
सत्संग वाली गाड़ी से घर को लौट जाओगे-
समय तेरा निकल न जाए इसका ख्याल रखना है-
सत्संग में जाना है संतो का ज्ञान पाना है-
समय तेरा निकल न जाए इसका ख्याल रखना है-
बचपन खोया खेल साल में जवानी खोई युवा चाल में-
समय तेरा निकल न जाए बुढ़ापा आई इस ख्याल में-
तुम तो ठेहर मृत्यु लोक में अमर लोक को कब जाओगे...
Posted on: Nov 14, 2017. Tags: SHANTI KUMARI SONG VICTIMS REGISTER
तुलसी का बिवरा ला चौराहा में लगाले...गीत
ग्राम-देवरी, पोस्ट-चंदोरा, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से शिवकुमार पोया एक गीत सुना रहे हैं :
तुलसी का बिवरा ला चौराहा में लगाले-
केरा गोंदा ला लगाले कुआ बारी मा-
अंधा हो अंधली के सून ले पुकार-
एके जन बेटा रे श्रवण कुमार-
पानी ला पियादे बेटा श्रवण कुमार-
चोला ला बचादे बेटा श्रवणकुमार...
Posted on: Nov 04, 2017. Tags: SHIVKUMAR POYA SONG VICTIMS REGISTER
चाहे जितना चाहे भीगो पहली पड़ी फुहार है...कविता -
ग्राम-पाली, पोस्ट-जामु, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से शिवकुमार द्विवेदी एक कविता सुना रहे हैं:
चाहे जितना भीगो पहली पड़ी फुहार है-
बड़े दूर से थके-थके ये प्यारे बदल आये है-
झूम उठेगी सारी दुनिया इतनी मस्ती लाये है-
कभी नगाड़े से बजती है कभी चमकती है बिजली-
गोरी-गोरी नदियों में जब देय चमकती है उजड़ी-
जहाँ-जहाँ तक नजरे जाती पानी का संसार है...
Posted on: Oct 16, 2017. Tags: SHIVKUMAR DWIVEDI SONG VICTIMS REGISTER
पढ़ती हूँ तुम्हारे बल से जरा ध्यान करो माँ : सरस्वती वंदना...
किलकारी बाल केंद्र मुजफ्फरपुर बिहार से कीर्ति कुमारी एक सरस्वती वंदना सुना रही है:-
पढ़ती हूँ तुम्हारे बल से जरा ध्यान करो माँ-
हम लोग है नादान विद्या दान करो माँ-
हे माँ सरस्वती हे माँ सरस्वती-
जब आये परीक्षा मेरी मेरा भय मिटा देना-
सुन लो प्रार्थना मेरी कही बदनाम ना होना-
हे माँ सरस्वती हे माँ सरस्वती-
पढ़ती हु तुम्हारे बल से जरा ध्यान करो माँ-
हम लोग है नादान विद्या दान करो माँ-
हे माँ सरस्वती हे माँ सरस्वती...
Posted on: Sep 30, 2017. Tags: KIRTI KUMARI SONG VICTIMS REGISTER
सूरज की किरणे आती है, सारी कलियाँ खिल जाती है...कविता
ग्राम-पाली, जिला-रीवा (म.प्र.) से शिवकुमार द्विवेदी एक कविता सुना रहे है:
सूरज की किरणे आती है सारी कलियाँ खिल जाती है-
अंधकार सब खो जाता है सब जग सुन्दर हो जाता है-
चिड़िया गाती है मिलजुलकर बहते उनके मीठे स्वर-
ठंडी-ठंडी हवा सुहानी चलती है जैसे मस्तानी-
नयी ताजगी नयी कहानी नया जोश पाते है प्राणी-
सुबह गर्मी लगती है जिनको मेहनत प्यारी लगती उनको-
मेहनत सबसे अच्छा गुण आलस बहुत बड़ा दुर्गुण है...
