बाप के मया महतारी के दुलार, तब आज हमरे दुनिया देखेन संसार...कविता-
ग्राम-देवरी, पोस्ट-चंदोरा, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलास सिंह पोया एक कविता सुना रहे हैं :
बाप के मया महतारी के दुलार-
तब आज हमरे दुनिया देखेन संसार-
दोना में बासी खवाईस, कटोरा में पानी पियाईस-
तब हमके सुग्घर पैदा करिस और गोदी में खिलाईस-
अंगुली पकड़ के रेंगना सिखाईस और पेशाब मैदान ला साफ करिस-
तब हमके दाऊ दाई मन आज दुनिया ला देखाईस...
Posted on: May 31, 2019. Tags: CG KAILASH SINGH POYA POEM PRATAPPUR SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
करे कोशिश अगर इंसान को क्या-क्या नही मिलता...कविता
ग्राम-चरगांव, पंचायत-चरगांव, जिला-डिंडोरी, (मध्यप्रदेश) से अंजली सोनवानी एक कविता सुना रहे हैं:
करे कोशिश अगर इंसान को क्या-क्या नही मिलता-
वह उठकर चलके तो देखो जिसे रास्ता नही मिलता-
भले धुप हो काटें हो चलना ही पड़ता है-
किसी प्यासे को घर बैठे दरिया नही मिलता-
कहें क्या ऐसे लोगों से जो कहकर लडखडाते हैं-
की हम आकाश छू लेते मगर मौक़ा नही मिलता...
Posted on: May 27, 2019. Tags: ANJLI SONWANI DINDORI MP POEM SONG VICTIMS REGISTER
तोड के मज़बूरी के बंधन पा लूँ मै भी आत्म सम्मान को...कविता
ग्राम-चरगांव, पंचायत-चरगांव, जिला-डिंडोरी, (मध्यप्रदेश) से अंजली सोनवानी एक कविता सुना रही है:
आजादी के पंख लगा के छू मै भी आसमान को-
तोड के मज़बूरी के बंधन पा लूँ मै भी आत्म सम्मान को-
तुफानो से खुद ही लड़ के खुद के दम पर आगे बढ़ के-
चाहूँ मै भी मंजिल पाना अपने गुण सबको दिखलाना-
कैद हो जो पंछी पिंजरे में वो क्या जाने गगन की माया-
तन मन स्वतंत्र हो जब मेरा तभी मानूँ जीवन पाया...
Posted on: May 27, 2019. Tags: ANJLI SONWANI DINDORI MP POEM SONG VICTIMS REGISTER
जो अपने से सदा बड़ो का आदर मान किया करते हैं...कविता-
ग्राम-तरगाँव, पंचायत-भैसवाही, जिला-डिंडोरी (मध्यप्रदेश) से आरती सोनवानी एक कविता सुना रही हैं :
जो अपने से सदा बड़ो का आदर मान किया करते हैं-
पास बड़ो के आने पर उठ सम्मान किया करते हैं-
अतिथि जनो के घर आने पर जो सत्कार करते हैं-
देव समझकर अभिनंदन करते वे बच्चे अच्छे लगते हैं...
Posted on: May 26, 2019. Tags: ARTI SONWANI DINDORI MP POEM SONG VICTIMS REGISTER
माँ मुझे तू अपने आँचल मै ढक कर सुलाया-कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
माँ मुझे तू अपने आँचल मै ढक कर सुलाया-
माँ मुझे तू अपने सीने से लगा कर दोध पिलाया-
माँ मुझे तू ऊँगली पकड़ कर चलना सिखाया-
माँ मुझे तू दुन्य मै चलने का रीत समझाया-
माँ मुझे हर सुख दुख से तू खुद झेल मुझे बचाया...
