आज शासन आदिवासी इलाके में संविधान का पालन नहीं कर रही है...(गोंडी भाषा में)

छत्तीसगढ़ में कांकेर जिले से विश्राम गावड़े सविंधान और गोंडी संस्कृति के बारे में बता रहे हैं, इसे बचाये रखना जरुरी है|आज तो शासन प्रशासन संविधान का पालन नहीं कर रही है, भारतीय संविधान 244 अनुच्छेद के अंतर्गत प्रावधान है गाँव के बिना अनुमति के कोई सरकार किसी के जमीन में कब्जा नहीं कर सकती न ही उनके खनिज को ही ले सकती है|लेकिन शासन प्रशासन हमारे बस्तर संभाग में जबरदस्ती कर रही है|हमारे गाँव लम्कंहार में भी आई आई टी के तहत अदला बदली कब्जा कर रही है, इसी तरह मेटटा बोदेली गाँव के जंगल को उजाड़ दिया और वहां के लोगों को रोजगार नहीं न ही पानी की व्यवस्था है और न ही शिक्षा की व्यवस्था है|हमारे लोग इसके साथ रावघाट आदि को बचाने लिए दो दिन की रैली भी निकाले थे, लेकिन शासन प्रशासन अभी फोर्स को तैनात कर दिया है जो हम जैसे बोलने वालों को जेल ले जाती है,तो हमें इन सबका विरोध करना पड़ेगा |

Posted on: Apr 30, 2018. Tags: VISHRAM GAWDE GONDI

आदिवासी संस्कृति में दारु पीने का नहीं बल्कि देवी देवताओ को चढाने का रिवाज है...(गोंडी)

ग्राम लाम्कंहार, तहसील अंतागढ़, जिला कांकेर,छत्तीसगढ़ से विश्राम गावड़े बता रहे हैं, दारु पीना आदिवासी संस्कृति में नहीं है लेकिन जो महुआ का फूल और छिलका को भिगो करके प्रकृति को अर्पण करते हैं|आदिवासी तो इसका व्यवसाय भी नहीं करते हैं |आदिवासी इसे इकठ्ठा करके रखे रहते थे और शादी,तीज,तिहार,जतरा में उपयोग करते थे और भूखमरी के लिए भी इसका उपयोग करते थे|लोग कहते हैं दारु से आदिवासी का विकास नहीं हो रहा है तो मैं शासन,प्रशासन से कहना चाहता हूँ कि जितने भी सरकारी शराब दूकान, भट्टी हैं उन्हें बंद किया जाए|क्योंकि इस से कई गाँव खाली हो चुके हैं आजकल गाँव में कोई युवा नहीं मिलेंगे अगर कोई हो भी तो उसे नक्सल बताकर गोली मार दिया जाता है |

Posted on: Apr 29, 2018. Tags: VISHRAM GAWDE GONDI