पुस्तक ही सच्चा मित्र है,इसे पहचानना सिखों ....
ग्राम- बड़वानी मध्यप्रदेश से सुरेश जी पुस्तकों से सच्ची दोस्ती का परिणाम उजागर करना चाह रहे हैं,आइए इनके कथन पर दृष्टि डालें|पुस्तकों से सच्ची दोस्ती करना चाहिए,क्योंकि सच्चा मित्र महान होता हैं,वह पग-पग पर दिशा निर्देश देता हैं,उचित-अनुचित का ज्ञान कराता हैं,जीवन कों सत्य के मार्ग पर ले जाता है,सद्गुण और संस्कार जाग्रत करता हैं|आधुनिक युग में सच्चे मित्र सौभाग्य से ही मिलतें हैं|आधुनिक समाज में व्यक्ति स्वार्थी होता जा रहा है|आज सच्चे मित्र को मिलना सपना-सा हो गया है,तब पुस्तकें ही सच्चे मित्र के रूप में साथ देती हैं,इसलिए इस स्वार्थी जीवन में पुस्तकें पढ़ने का आदत डालनी चाहिए,इसी से मानसिक और बुद्धि का विकास होता है|जिसने पुस्तकों को अपना सच्चा मित्र बना लिया,वह कभी जीवन में असफल नहीं हो सकता,इसलिए इस सच्ची मित्र को पहचान लेना चाहिए और सदा अपने साथ रख लेना चाहिए|
