वनांचल स्वर : लोग वन उपजों को इकठ्ठा कर समूह को बेचते हैं, सरकार उसे समूह से खरीद लेती है -
ग्राम-संगम, तहसील-पखांजूर, ब्लाक-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से सीजीनेट जन पत्रकारिता जागरूकता यात्रा के बस्तीराम नागवंशी गाँव के एक निवासी से चर्चा कर रहे हैं वे बता रहे हैं, उन्हें जंगल से कई तरह के वन उपज प्राप्त होते है, जिसमे लाख, कोसुम बीजा, महुआ बीजा, टोरा बीजा आदि शामिल है, जिसको वे इकठ्ठा कर समूह को बेचते हैं, जिसके लिए सरकार समूह को पैसा देता है, लाख कोसुम के पेड़ से प्राप्त होता है, दूसरे पेडो से भी लाख प्राप्त होता है, लेकिन कोसुम पर ज्यादा होता है, वे महुआ का रस बनाते है, महुआ को भी इकठ्ठा कर समूह को बेचते हैं, इस तरह से वन उपज गाँव में लोगो के जीवन यापन का एक साधन है | इस इलाके में कोसा अधिक नहीं होता है
Posted on: Sep 21, 2018. Tags: BASTIRAM NAGWANSI CG KANKER SONG VANANCHA SWARA VICTIMS REGISTER
अभी अंग्रेज़ी पहली कक्षा से पढ़ाते हैं पर मेरे स्कूल में गोंडी पढ़ाते हैं कि नहीं मुझे नहीं पता: शिक्
ग्राम-अमोड़ी, विकासखण्ड-अंतागढ़, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से मनोज कुमार ध्रुव बता रहे हैं, वे अमोड़ी शासकीय हाई स्कूल में शिक्षक के पद पर 2006 से पदस्थ हैं, वे कह रहे हैं आज की शिक्षा और पहले की शिक्षा में अंतर है पहले बच्चो को अंग्रेज़ी की पढाई 5वी कक्षा से शुरू की जाती थी, लेकिन आज पहली से ही हो जाती है, जिसके कारण जानकारी बढ़ी है, कई नई नई तरह तरह की योजनाएं भी आती रहती हैं, उनके स्कूल में गोंडी भाषा की पढाई माध्यमिक स्तर पर नहीं होती पर प्राथमिक कक्षा में की जाती है या नहीं उनको नहीं पता है, वे अपने विद्यालय के संचालन के लिए छोटी बड़ी समस्याओ पर गांव वालो की मदद लेते हैं इस प्रकार से वे स्कूल चला रहे हैं |
Posted on: Jul 26, 2018. Tags: BASTIRAM NAGWANSI MANOJ KUMAR DHRUV SONG VICTIMS REGISTER
पादय दसन एरर की पा दंता दसन एरर हंजल खोचोरो फे...धर्म गीत
ग्राम-हराडीपा,पंचायत-बरवेनगर, तहसील-चैनपुर, जिला-गुमला (झारखण्ड) से गोलोरिया टोप्पो, शोभा कुजूर और तोसन मिंज चर्च में गाने वाला एक धर्म गीत सुना रही हैं :
पादय दसन एरर की पा दंता दसन एरर हंजल खोचोरो फे-
पा दंता दसन एरर की, पा दंता दसन एरर खांजल खोचोरो फे-
ला लारये ये सोसन गा मोदेरर के रा रा-
लार मातेसन गा मोदेरर के-
हाय रेंगय सोना लेका जिया-
हाय लारये ये सोसन गा मोदेरर के रा रा...
Posted on: Jul 14, 2018. Tags: BASTIRAM NAGWANSI SONG VICTIMS REGISTER
औषधीय पौधा चितावर के नाम पर पड़ा हमारे गांव का नाम चितरपुर...एक गाँव की कहानी-
ग्राम-चितरपुर, पंचायत-कातिम, प्रखण्ड-चैनपुर, जिला-गुमला (झारखण्ड) से ग्रामवासी बर्थलोमी लकरा बता रहे हैं, उनके गांव में एक पौधा होता था, जिसे चितावर के नाम से जानते हैं, जो पूरे गांव में मिलता था, उसी के नाम पर गांव का नाम चितरपुर पड़ा, ये पौधा केवल गांव में ही पाया जाता है, उसे दवा के लिए भी उपयोग करते हैं, लेकिन अब उस पौधे की संख्या कम हो गई है, लोग पौधों को काटकर खेत बना चुके हैं, ये जानकारी उन्हें अपने पूर्वजो द्वारा लिखी किताब से मिली, वर्तमान में गांव में 107 घर है, इस प्रकार से चितरपुर गांव का नाम एक औषधीय पौधा चितावर के नाम पर पड़ा और आज भी इसी नाम से जाना जाता है |


