की जीना है रे रवा जाये, जैहो आ, झोला धर चल दशरहा रे...दशरहा गीत-
ग्राम-देवरी, पोस्ट, थाना-चंदोरा, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलास सिंह पोया दशहरा गीत सुना रहे हैं :
की जीना है रे रवा जाये, जैहो आ-
झोला धर चल दशरहा रे-
कि संगी रेंगे कर मेरवा जाये लईका आज-
की जीना है रे रवा जाये, जैहो आ-
झोला धर चल दशरहा रे-
कि संगी रेंगे कर मेरवा जाये लईका आज...
Posted on: Jun 01, 2019. Tags: CG KAILASH SINGH POYA SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
स्वास्थ्य स्वर : गर्मी के दिनों में होने वाली घमोरियां के रोकथाम का घरेलू उपचार-
रायपुर (छत्तीसगढ़) से वैद्य दिलीप कुमार गुप्ता गर्मी के दिनों में होने वाली घमोरियां के रोकथाम का घरेलू उपचार बता रहे हैं| नीम की पत्ती 100 ग्राम और 5 नग नीबू कटे हुए लें | एक लीटर पानी में दोनों को अच्छी तरह से पका लेवें| जब पानी उबलकर आधा लीटर रह जाये, तब छानकर रख लें| अब 50 ग्राम फिटकरी का चूर्ण बना लें, और दवा में मिला लें| दवा को बोतल में भरकर फ्रिज या घड़े में डाल दें| जिससे दवा ताजा रहे| दवा को दिन में तीन बार घमोरियों पर लगाना है| इससे आराम मिल सकता है| अधिक जानकारी के लिये संपर्क कर सकते हैं : दिलीप कुमार गुप्ता@8109855459.
Posted on: Jun 01, 2019. Tags: CG DILIP KUMAR GUPTA HEALTH RAIPUR SONG VICTIMS REGISTER
स्वास्थ्य स्वर : पथरी बीमारी का घरेलू उपचार-
प्रयाग विहार, मोतीनगर, रायपुर (छत्तीसगढ़) से वैद्य एच डी गांधी पथरी बीमारी का घरेलू उपचार बता रहे हैं| पत्थर चट्टा 100 ग्राम लें, और पानी में मिलाकर पीस लें| उसके बाद सुबह-शाम एक-एक गिलास खाली पेट सेवन करें | लाभ हो सकता है| पानी का ज्यादा सेवन करें|| दूसरा कुल्थी की दाल 100 ग्राम रात को भिगोकर रख दें| सुबह चबाकर खायें और उसके पानी को पियें| तीसरा कुल्थी की 100 ग्राम दाल को एक लीटर पानी में उबालें| जब वह एक गिलास रह जाये तो छानकर पी सकते हैं| दाल को खा सकते हैं| मिर्च, मसाला, तेल, खटाई, गरिष्ठ पदार्थ का प्रयोग न करें| नशा न करें| अधिक जानकारी के लिये संपर्क कर सकते हैं : एच डी गांधी@9111061399.
Posted on: Jun 01, 2019. Tags: CG HD GANDHI HEALTH RAIPUR SONG VICTIMS REGISTER
मेरे नन्हें-नन्हें चूजो दूर कभी न जाना...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक बाल कविता सुना रहे हैं :
मेरे नन्हें-नन्हें चूजो दूर कभी न जाना-
जो भी हो पास तुम्हारे मिल बाँट खा लेना-
नन्हें-नन्हें पंख तुम्हारी उड़ने भी ढंग से नह सीखे हो-
कोमल-कोमल हाथ पाँव तुम्हारी संभलना भी नही सीखे हो-
ऊँची-ऊँची पहाड़ पर्वत ऊँची गहरी खाई है-
ठौर-ठौर पर ब्याध का पहरा उनके आँखे ऊँची ललचाई है...
Posted on: Jun 01, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
गांव के लोग परसा पान का पत्तल बनाकर उपयोग करते हैं-
ग्राम-नागाडबरा, पंचायत-माटपुर, तहसील-पंडरिया, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से श्यामकली परसा पान के उपयोग के बारे में बता रही हैं| परसा पान या पत्ता का उपयोग वे पत्तल बनाने के लिये करते हैं| जिसका उपयोग खाना खाने के काम होता है| वे एक दिन में 100 से 150 तक पत्तल बना लेते हैं| गांव में जब कोई बड़ा कार्यक्रम या शादी होता है| तब ग्रामीण उसका पत्तल बनाते हैं| ये उन्हें आसानी से उपलब्ध हो जाता है| पत्ते के उपयोग करने से उन्हें बर्तन धोने या ज्यादा संख्या में बर्तन खरीदने जैसी समस्या नहीं होती| और ये आसानी से नष्ट भी हो जाता है| जिससे वातावरण भी दूषित नहीं होता |
