ऊँची पहाड़ ऊँचा पेड़ नहीं वहां कोई माली...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
ऊँची पहाड़ ऊँचा पेड़ नहीं वहां कोई माली-
कुदरत उनकी रक्षा करे शेर भालू करे रखवाली-
फल फूल डेटा हमको लकड़ी भी भारी भारी-
हमारा वो सब शुभ चिंतक हैं नहीं चलाना उन पर आरी-
वे वर्षा करवाते हैं बादलों को बुलाकर-
वे जीवन बचाते हैं शुद्ध वायू हमें देकर...

Posted on: Apr 11, 2020. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

मध्यान्ह भोजन योजना जब से आई है...कविता-

ग्राम-लालपुर, पंचायत-बेलबहरा, जिला-कोरिया (छत्तीसगढ़) से अशोक कुमार एक कविता सुना रहे हैं:
मध्यान्ह भोजन योजना जब से आई है-
बच्चो प्यारो के मन में खुशियाँ छाई है-
पूजा बोली भाई से सुन भईया दीनू-
मध्यान्ह भोजन का अब आया है मीनू-
बच्चो की रूचि का रखा गया ख्याल-
मंगलवार को मिलेगी फ्राई की डाल...

Posted on: Apr 11, 2020. Tags: ASHOK KUMAR CG KORIYA POEM SONG VICTIMS REGISTER

देशद्रोहियों आंखे खोलो... कोरोना पर कविता-

सिवनी, जिला- गौरेला, पेंड्रा, मरवाही (छत्तीसगढ़) से कामता प्रसाद शर्मा कोरोना पर एक कविता सुना रहे हैं :
देशद्रोहियों आंखे खोलो-
ऐसे संकट घड़ी में जहर भरी ना बाते बोलो-
देशद्रोहियों आंखे खोलो-
सम्हल जाओ एक हो जाओ-
भारत देश का नाम बढाओ-
देश हमारा जूझ रहा है-
संकट में यूं ना विष घोलो-
देशद्रोहियों आँखे खोलो-
राज़ धर्म जो नियम बताए-
उसको संयम से अपनाओ-
मन भेद भाव ना लाये-
मदद करो देश के हित में-
अपने धर्म से अब ना डोलो-
देशद्रोहियों आँखे खोलो-
लॉक डाउन का करिये पालन-
मानो बात कहे जो शासन-
पुलिस, मीडिया,नर्स,डॉक्टर-
प्रेम भाव से इन्हें अपनालो-
ये धर्मो की नही बीमारी-
विश्व मे जो फैली महामारी-
लोगो से नही इसे चिन्हारी-
जो भी मिलेगा उसे डसेगा-
इससे अपना हाथ भी धोलो-
देशद्रोहियों आंखे खोलो...

Posted on: Apr 11, 2020. Tags: CG CORONA GPM KAMATA PRASAD SHARMA POEM SONG VICTIMS REGISTER

न ये तोप के गोले रखते न बंदूक की गोलियां...कोरोना पर कविता-

राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व एक कविता सुना रहे हैं:
न ये तोप के गोले रखते न बंदूक की गोलियां-
यत्र तत्र सर्वत्र बिखरते स्वास्थ्य कर्मियों की टोलियाँ-
स्वास्थ्य कर्मी यदि पुरुष है तो वो वीर है-
यदि महिला है तो वीरांगना-
रोगी को निरोगी करने के लिये नींद भी पड़ा है त्यागना-
सैनिक रहते मैदानों में ये रहते अस्पतालों में-
न ये तोप के गोले रखते न बंदूक की गोलियां...

Posted on: Apr 10, 2020. Tags: CG CORONA POEM RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV

दाई दादा जैसे कुकुर काकर...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
दाई दादा जैसे कुकुर काकर-
सास ससुर दूध दही खाथे-
दाई दादा बर खोरो खटिया-
ओकर बर पलंग बिछाथे-
दाई दादा जैसे कुकुर काकर-
ये ओकय चुचुवाथे

Posted on: Apr 09, 2020. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

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