मत निकल, मत निकल, मत निकल...कविता-
मालीघाट, मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार महान कवि डॉ. हरिवंशराय बच्चन की कविता “मत निकल, मत निकल, मत निकल” सुना रहे हैं:
शत्रु ये अदृश्य है, विनाश इसका लक्ष्य है-
कर न भूल, तू जरा भी ना फिसल-
मत निकल, मत निकल, मत निकल-
हिला रखा है विश्व को, रुला रखा है विश्व को-
फूंक कर बढ़ा कदम, जरा संभल-
मत निकल, मत निकल, मत निकल-
उठा जो एक गलत कदम, कितनों का घुटेगा दम-
तेरी जरा सी भूल से, देश जाएगा दहल-
मत निकल, मत निकल, मत निकल-
संतुलित व्यवहार कर, बन्द तू किवाड़ कर-
घर में बैठ, इतना भी तू ना मचल-
मत निकल, मत निकल, मत निकल...
Posted on: Apr 16, 2020. Tags: BIHAR MUZAFFARPUR POEM SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
जाते नहीं हैं काम पर, कोरोना के नाम पर...कोरोना पर कविता-
राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व कोरोना पर एक कविता सुना रहे हैं:
जाते नहीं हैं काम पर, कोरोना के नाम पर-
कोरोना, कोरोना-
बस यहाँ वहां कोहराम है-
पशु पक्षी तो आजाद विचरण कर रहे हैं-
किन्तु मनुष्य गुलाम है-
कोरोना के नाम पर आज कैसी सजा दे है-
आज हर कोई अपने घर में कैदी है...
Posted on: Apr 15, 2020. Tags: CG CORONA POEM RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
तन में ग्रहण मन में ग्रहण...गीत-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीगढ़) से राजेंद्र गुप्ता एक कविता सुना रहे हैं:
तन में ग्रहण मन में ग्रहण-
ग्रहण, ग्रहण, ग्रहण-
जिंदल को ग्रहण, मोनेट को ग्रहण-
ग्रहण, ग्रहण, ग्रहण-
हर जगह ग्रहण-
2020 का ग्रहण आने वाला है प्रभू-
तन में ग्रहण मन में ग्रहण-
ग्रहण, ग्रहण, ग्रहण...
Posted on: Apr 15, 2020. Tags: CG POEM RAIGARH RAJENDRA GUPTA SONG VICTIMS REGISTER
अमेरिका ब्राजील इज़राइल चाहे हो इंग्लैण्ड...कोरोना पर कविता-
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व कोरोना पर एक कविता सुना रहे हैं:
अमेरिका ब्राजील इज़राइल चाहे हो इंग्लैण्ड-
कोरोना के खातिर सबकी हालत रही है बैंड-
कल तक भारत विश्व गुरु था आज भी हालत वही है-
विदेशो को दवा भेजने की जिम्मेदारी भारत की रही है-
विदेशो की दवाओं की खेपें अविरल रहा है सेंड-
अमेरिका ब्राजील इज़राइल चाहे हो इंग्लैण्ड-
कोरोना के खातिर सबकी हालत रही है बैंड...
Posted on: Apr 12, 2020. Tags: CG CORONA POEM RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
पर्वतों के शिखर से आ रही आवाज...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
पर्वतों के शिखर से आ रही आवाज-
तुम मुझे विनाष क्यों कर रहे हो आज-
मै तो सदियों से खड़ा हूँ तुम आये हो आज-
तुम मुझे बर्बाद करने को क्यों तुले हो आज-
मै तुम्हे शुद्ध हवा डेटा हूँ, मै ही देता हूँ तुम्हे पानी-
मेरा उपकार को भूलकर कर रहे हो अपनी मनमानी...
