गाँव-गाँव में विराजे दुर्गा प्रतिमा देवी भक्ति जस गीत सुना रहे है...
जिला कोरबा (छत्तीसगढ़) से मनोज महंत (हरमुनियम) वादक श्याम भाई (ढोलक) वादक देवी भक्ति जस गीत सुना रहे है कोरबा (छत्तीसगढ़) दुर्गा उत्सव समिति द्वारा की गई अलग-अलग प्रतिमाएं स्थापित नौ दिन के लिए स्थापित मां दुर्गा अलग-अलग रूप धारण करती हैं| प्रतिदिन माता सेवा के गीत भी गाए जा रहे हैं। इस विभिन्ना स्वरूप को देखने के लिए आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में प्रतिदिन दर्शनार्थ उपस्थित हो रहे हैं।
Posted on: Oct 04, 2019. Tags: MANOJ MAHANT KORBA CG SONG VICTIMS REGISTER
देशभक्ति गीत : मेरे देश की माटी बन गई सोना-
ग्राम-राजापुर, पोस्ट-लडवारी, जिला-निवाड़ी (मध्यप्रदेश) से मनोज कुशवाहा देशभक्ति गीत सुना रहा है:
मेरे देश की माटी बन गई सोना-
दुल्हन सी लागे धरती हमारी-
प्राणों से प्यारी है माता धरती-
नदिया बहती कल-कल करते धरती-
माता के चरणों में रहके-
खेती के दिन पूजा जाता-
माता का दिल भर जाता-
भारत की धरती पर एकता हो जाते-
धन हो जाते, धन हो जाते-
अर्जुन कृष्णा राम की भूमि-
भारत की भूमि है स्वर्ग के सुन्दर-
इस पर जन्में मनु और मनिंदर...
Posted on: Oct 02, 2019. Tags: MANOJ KUSHWAHA NIWARI MP SONG VICTIMS REGISTER
तितली रानी लगता हैं वो स्वर्ग की रानी...कविता-
ग्राम-राजापुर, पोस्ट-लड़वारी, जिला-निमाड़ी (मध्यप्रदेश) से मनोज कुसवाहा कविता सुना रहे हैं :
तितली रानी लगता हैं वो स्वर्ग की रानी – फूलो का पीती पानी पानी-
देख मन को होती हैरानी-
फूलो से रंग सभी ले जाती-
अपने पंखो को खूब सजाती – रंग बिरंगे पंखों वाली...
Posted on: Sep 19, 2019. Tags: MANOJ KUSWAHA MP NIMADI POEM SONG VICTIMS REGISTER
दशरथ जी के लाल हमने वन में जाके देखे हैं...गीत-
ग्राम-राजापुर, पोस्ट-लड़वारी, जिला-निवाड़ी (मध्यप्रदेश) से मनोज कुसवाहा एक गीत सुना रहे हैं :
दशरथ जी के लाल हमने वन में जाके देखे हैं-
सांथ सुकुमारी सीता यही तो परेखे हैं-
कैसे-कैसे वर मांगे, निरदई परी केकई रानी-
कटी नहीं जीभ जाकी, निकली मुख से कैसी वाणी-
दशरथ जी के लाल हमने वन में जाके देखे हैं...
Posted on: Mar 18, 2019. Tags: MANOJ KUSWAHA MP NIWARI SONG VICTIMS REGISTER
मीठी वाणी बोले राम, पति के पावन सीता राम...रामायण श्लोक-
ग्राम-राजापुर, पोस्ट-लड़वारी, जिला-निवाड़ी (मध्यप्रदेश) से मनोज कुसवाहा रामायण श्लोक सुना रहे हैं:
परशुराम क्रोधित हो आये, दुष्ट भूप मन में हरसाए-
जनक राज ने किया प्रणाम-
पति के पावन सीता राम-
बोले लखन सुनो मुनि ज्ञानी-
संत नहीं होते अभिनामी-
मीठी वाणी बोले राम, पति के पावन सीता राम...
