हरे हरे और गीले गीले, लाल बैगनी और कुछ पीले...गीत-
बिजुरी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से रुकसार खान एक कविता सुना रही हैं:
हरे हरे और गीले गीले-
लाल बैगनी और कुछ पीले-
तरह के होते पत्ते-
बड़ी तरह के होते पत्ते-
कुछ हांथी के कान के जैसे-
फड़फाड़ाये शैतान के जैसे-
कटे फटे कुछ मोड़े, कुछ पान के जैसे... (AR)
Posted on: Jun 27, 2020. Tags: ANUPPUR MP POEM RUKSAR KHAN SONG VICTIMS REGISTER
मुह धोऊंगी पानी से मुन्ना कहता नानी से...कविता-
बिजुरी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से रुकसार खान एक कविता सुना रही हैं:
मुह धोऊंगी पानी से मुन्ना कहता नानी से-
प्यासे पानी पीते हैं, पानी से सब जीते हैं-
जाने कब से पानी है कितनी बड़ी कहानी है-
कहीं ओस है बर्फ, कहीं पानी हि क्या भाप नहीं-
सब रूपों में पानी है कहती ऐसे नानी है-
नदिया बहती कल कल कल-
झरने गाते छल छल छल छल... (AR)
Posted on: Jun 27, 2020. Tags: ANUPPUR MP POEM RUKSAR KHAN SONG VICTIMS REGISTER
कहां मिलता है चैन पत्थर के इन मकानों में...कविता-
नवलपुर, जिला-मुंगेली (छत्तीसगढ़) से नेहा बुनकर एक कविता सुना रही हैं, जिसका शीर्षक है : ज़िंदगी के मैदानों में :
कहां मिलता है चैन पत्थर के इन मकानों में-
बहुत कोशिश करते हैं जो खुद का वजूद बनाने की-
हो जाते हैं अपनों से दूर नजर आते हैं बेगानों में-
हस्ती नहीं रहती दुनिया में एक लंबे दौर तक-
आंखिर में जगह मिलती है कहीं दूर श्मसानों में-
कहां मिलता है चैन पत्थर के इन मकानों में... (AR)
Posted on: Jun 27, 2020. Tags: CG MUNGELI NEHA BUNKAR POEM SONG VICTIMS REGISTER
छा गयी मायूसी हर गलियाँ हर चौबारे पर...नशा मुक्ति कविता-
ग्राम-नवलपुर, ब्लाक-लोरमी, जिला-मुंगेली (छत्तीसगढ़) से अनुराधा बुनकर एक नशा मुक्ति कविता सुना रही हैं:
छा गयी मायूसी हर गलियाँ हर चौबारे पर-
लोगो ने अपने हालत बदल डाले-
नशे की पड़ी एसी आदत इनको-
जीने के अपने अंदाज बदल डाले-
दे रहा है भारत अपनी तरक्की की मिशले-
युवा कर कर नशे का व्यापार-
लुप्त हो संस्कृति हमारी, जिसका था हमें गुमान... (AR)
Posted on: Jun 26, 2020. Tags: ANURADHA BUNKAR CG MUNGELI POEM SONG VICTIMS REGISTER
छूट गया घर सोने का...कविता-
ग्राम-खुटैनी, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से प्रियंका मार्को एक गीत सुना रही हैं:
छूट गया घर सोने का-
सुना पहले थी ये विराना-
किसी रंग बिरंगे और उमंग भरे मै-
मेले के लौटने पर एक आदमी देखा-
थका हारा और बिलकुल अकेला...
