मुस्कुराके बोला वो, मुझसे डरो न...कोरोना कविता-
ग्राम-नवलपुर, पोस्ट-कोरतरी, ब्लाक-लोरमी, जिला-मुंगेली (छत्तीसगढ़) से नेहा बुनकर कोरोना पर एक कविता सुना रही हैं:
कल रात सपने में आया कोरोना-
उसे देख जो मै डरती-
मुस्कुराके बोला वो, मुझसे डरो न-
उसने कहा कितनी प्यारी है तुम्हारी संस्कृति-
न चुमते न गले लगाते-
दोनों हांथ जोड़कर वो स्वागत करते...(AR)
Posted on: Jul 09, 2020. Tags: CG MUNGELI NEHA BUNKAR POEM SONG VICTIMS REGISTER
गमला फूलो वाला ला...कविता-
ग्राम-नवलपुर, जिला-मुंगेली (छत्तीसगढ़) से जया बुनकर एक कविता सुनवा रही हैं:
गमला फूलो वाला ला-
अपना घर आंगन महकाओ-
घर से पानी लेकर आओ-
पौधे की तुम प्यास बुझाव-
मछली देखो आओ आओ-
रस्सी कूदो नाचो गाओ... (AR)
Posted on: Jul 06, 2020. Tags: CG MUNGELI NEHA BUNKAR POEM SONG VICTIMS REGISTER
हम सब बच्चे भारत वासी, अपना भारत बड़ा महान-कविता सुना रहें है...
संदीप कुमार कुशवाहा जिला सतना मध्यप्रदेश से कविता सुना रहें है |
हम सब बच्चे भारत वासी, अपना भारत बड़ा महान |
इच्छा है बस मन में इतनी, हो भारत की ऊँची शान ||
मात पिता और गूरुओ का ,करते राहें सादा सामान |
सच्चाई को कभी ना छोड़ो, ऐसा वर दो हे भगवान ||
जय हिंद जय भारत ...
Posted on: Jul 05, 2020. Tags: (NRAYNPUR) KUMAR KUUSWAHA POEM SANDEEP SATNA SONG VICTIMS REGISTER
गोरे-गोरे काले-काले बादल आये दादी वाले...कविता-
ग्राम-बिजुरी, जिला-अनुपपुर मध्यप्रदेश से रुखसार खान एक कविता सुना रही है जिसका शीर्षक है : बादल आये-
गोरे-गोरे काले-काले बादल आये दादी वाले-
कुत्ता गया हाथी घोडा और कभी हंसो का जोड़ा-
यात्री बनकर और न भैसे दौड़ेंग वो करमत वाले-
पल में आते पल में जाते महीनो कभी न नजर आते-
और कभी जम जाते ऐसे हाथ को तटमट चलते टाले...
Posted on: Jul 03, 2020. Tags: ANUPPUR MP POEM RUKSAR KHAN SONG VICTIMS REGISTER
मन खेला जीवन जिए भर पेज पसिया काफी है...छत्तीसगढ़ी कविता-
ग्राम-दक्कोटोला, पोस्ट-चिल्हाटी, तहसील-अम्बागढ़ चौकी, जिला-राजनंदगाँव, छत्तीसगढ़ से जयसिंह मोरले एक कविता सुना रहे है, शीर्षक जीवन जिए भर काफी है:
मन खेला जीवन जिए भर पेज पसिया काफी है-
जन बुलाओ दाई दादा ला मया के अचरा काफी है-
मेहनत कस मन के भर तोरकुम भुइया काफी है-
मया गोट बतातुं संगी मरार भर एक हरिया काफी है-
किसम-किसम के उपजारे संगी साख भाजी चूर चुटिया काफी है-
मेहनत कस मन के भर तोरकुम भुइया काफी है...
