अगर कहीं मै घोड़ा होता...बाल कविता-
ग्राम पंचायत-अमगंवा, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से रेशमी केवट एक कविता सुनवा रही हैं:
अगर कहीं मै घोड़ा होता-
वाहे लम्बा चौड़ा होता-
तुम्हे पीठ पर बैठा करके-
बहुत तेज मै दौड़ा होता-
पालक झपकते ही ले जाता-
दूर पहाड़ो की वादी में... (AR)
Posted on: Aug 01, 2020. Tags: ANUPPUR MP POEM RESHAMI KEWAT SONG VICTIMS REGISTER
लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती...कविता-
प्राथमिक शाला पिरमेटा, ब्लाक-बास्तानार, जिला-बस्तर छत्तीसगढ़ से जोगेंद्र पोड़ियाम एक कविता सुना रहा है:
लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती-
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती-
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है-
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है-
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है-
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है-
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती-
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती-
डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है-
जा जाकर खाली हाथ लौटकर आता है-
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में-
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में-
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती-
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती-
असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो-
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो...
Posted on: Aug 01, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER
पैसा पास होता तो चार चने लाते...कविता-
प्राथमिक शाला पीरमेटा, जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से मुनिरुधि नाग अपने साथियों के साथ एक कविता सुना रहे हैं:
पैसा पास होता तो चार चने लाते-
चार में से एक चना तोते को खिलाते-
तोते को खिलाते तो वो टाँय-टाँय टिक करता-
टाँय-टाँय करता तो बड़ा मजा आता-
पैसा पास होता तो चार चने लाते
चार में से एक चना घोड़े को खिलाते... (AR)
Posted on: Aug 01, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER
दीप जले दीप जले द्वार द्वार दीप जले...कविता-
प्राथमिक शाला पीरमेटा, जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से वंदना एक गीत सुना रही हैं:
दीप जले दीप जले द्वार द्वार दीप जले-
दीप जले गाँव गाँव बगिया के छांव छांव-
द्वार पे आंगनों में धूम मची है चाँव चाँव-
आगो रे गाव रे-
दीप जले दीप जले द्वार द्वार दीप जले... (AR)
Posted on: Aug 01, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER
सूरज के आते भौर हुआ लाठी ले जिनका शोर हुआ...नागपंचमी कविता-
जिला-राजनंदगाँव छत्तीसगढ़ से वीरेंद्र गन्धर्व आज नागपंचमी का पर्व है, कई लोग उपवास करते है नागदेवता को दूध पिलाते है और कामना करते है कि उनके जीवन में सुख शांति रहे है, पहले तो कुश्ती हुआ करती थी स्थान-स्थान में और आज भी हुआ करती है| उसी सम्बंधित एक कविता सुना रहे है :
सूरज के आते भौर हुआ-
लाठी ले जिनका शोर हुआ-
यह नागपंचमी झम्मक झम-
यह ढोल डामाका झम्मक झम-
मल्लो की जब टोली निकली-
चर्चा निकली फैली गली-गली...


