दुनिया गोल है : एक कविता
लोग कहते हैं कि दुनिया गोल है
लेकिन मैं कहता हूं कि दुनिया नहीं दुनिया के लोग गोल हैं
कोई किसी का शांति अमन को लेकर गोल है
कोई किसी का मनी रकम को लेकर गोल है
कहीं लडका लडकी को लेकर गोल है
कभी कभी तो अपने मोहल्ले की लाइन भी गोल है
तो मेरे भले साथी, अब भी दिन है सुधर जाओ
इस गोल होने से बाज आओ
क्योंकि हर एक की ज़ुबां पर इस बात की तौल है
कि एक न एक दिन इस दुनिया से हम सब की लाइन गोल है
Posted on: Oct 15, 2010. Tags: Suraj Dewangan
मेरे सिवा और भी हैं दुर्भागी
घर से निकला तो दुखी था इतना
कि ऐसा क्यों होता है सिर्फ मेरे साथ ही
क्यों हमेशा ली जाती है परीक्षा
मेरे धैर्य की, मेरी योग्यता की
वहां पहुंचा
तो लोगों की लम्बी कतार देख
काफी हल्का हुआ
मैं अकेला नहीं
मेरे सिवा और भी हैं दुर्भागी
अनवर सुहैल
Posted on: Oct 10, 2010. Tags: Anwar Suhail
बारिश से धुल न जाए बच्चों का भविष्य, हम एक ऐसी छत चाहते हैं...
हम बागी नहीं, हम बागी नहीं
हम बगावत नहीं चाहते हैं
हम अपना पेट भरने के लिए दो वक्त की रोटी चाहते हैं
मां, बहन, बेटियों का तन ढकने के लिए कपडा चाहते हैं
बारिश से धुल न जाए हमारे बच्चों का भविष्य
हम एक ऐसी छत चाहते हैं
मैं श्रमिक हूं, मैं श्रमिक हूं, मैं बागी नहीं, मैं बागी नहीं
जब कर दिया जाता है मेरी आवाज़ को अनसुना
जब सुनता नहीं कोई हमारी तो हम झंडा लेकर सडकों पर उतरते हैं
नारे लगाते हैं, गीत गाते हैं
तब कहते हैं वो सरकार में बैठे हुए लोग
कि हम विकास विरोधी हैं, हम विकास विरोधी हैं
हम फिर कहना चाहते हैं हम विकास विरोधी नहीं
हम बागी नहीं, हम बगावत नहीं चाहते हैं
चैनो अमन से रहना चाहते हैं
हम बगावत नहीं चाहते हैं
दो वक्त की रोटी, तन ढकने के लिए कपडा
और एक छोटा सा घर चाहते हैं
श्रमिक के दम पर बना है ये शहर, ये गांव, ये पूरा देश
उस श्रम का हम अपना हक चाहते हैं
Posted on: Oct 03, 2010. Tags: Subhash
देशों के बाज़ार में, हिन्दुस्तान नीलाम हुआ...
देशों के बाज़ार में, हिन्दुस्तान नीलाम हुआ
सदियों की बोली लगी, जंगलों की बोली लगी
जब उठी आवाज़ तो गोली लगी
देश अब सम्मान नहीं, देश अब सामान है
जिस पर लोग कर्ज़ लेते हैं अब बिकता इंसान है
देश की मिट्टी बिक चुकी, देश का पानी बिक चुका
हिन्दुस्तान बिक चुका, तिरंगे का रंग बिक चुका
अब देश में सिर्फ अंग्रेज़ों की टोली लगी
जब उठी आवाज़ तो गोली लगी
Posted on: Sep 26, 2010. Tags: subhash
ऐ मेरे साथियों, एक कौम बनो, इंसान बनो...
Subhash from Delhi appeals to all the young people to keep calm before the Ayodhya verdict. He says politicians and religious fanatics have been using young people to do the fighting. In any fight the poor who suffers and we should not be misused. He sings a poem :
न सिख बनो, न इसाई बनो
न हिन्दू बनो, न मुसल्मां बनो,
ऐ मेरे साथियों, एक कौम इंसान बनो
