बारिश से धुल न जाए बच्चों का भविष्य, हम एक ऐसी छत चाहते हैं...
हम बागी नहीं, हम बागी नहीं
हम बगावत नहीं चाहते हैं
हम अपना पेट भरने के लिए दो वक्त की रोटी चाहते हैं
मां, बहन, बेटियों का तन ढकने के लिए कपडा चाहते हैं
बारिश से धुल न जाए हमारे बच्चों का भविष्य
हम एक ऐसी छत चाहते हैं
मैं श्रमिक हूं, मैं श्रमिक हूं, मैं बागी नहीं, मैं बागी नहीं
जब कर दिया जाता है मेरी आवाज़ को अनसुना
जब सुनता नहीं कोई हमारी तो हम झंडा लेकर सडकों पर उतरते हैं
नारे लगाते हैं, गीत गाते हैं
तब कहते हैं वो सरकार में बैठे हुए लोग
कि हम विकास विरोधी हैं, हम विकास विरोधी हैं
हम फिर कहना चाहते हैं हम विकास विरोधी नहीं
हम बागी नहीं, हम बगावत नहीं चाहते हैं
चैनो अमन से रहना चाहते हैं
हम बगावत नहीं चाहते हैं
दो वक्त की रोटी, तन ढकने के लिए कपडा
और एक छोटा सा घर चाहते हैं
श्रमिक के दम पर बना है ये शहर, ये गांव, ये पूरा देश
उस श्रम का हम अपना हक चाहते हैं
