देशों के बाज़ार में, हिन्दुस्तान नीलाम हुआ...
देशों के बाज़ार में, हिन्दुस्तान नीलाम हुआ
सदियों की बोली लगी, जंगलों की बोली लगी
जब उठी आवाज़ तो गोली लगी
देश अब सम्मान नहीं, देश अब सामान है
जिस पर लोग कर्ज़ लेते हैं अब बिकता इंसान है
देश की मिट्टी बिक चुकी, देश का पानी बिक चुका
हिन्दुस्तान बिक चुका, तिरंगे का रंग बिक चुका
अब देश में सिर्फ अंग्रेज़ों की टोली लगी
जब उठी आवाज़ तो गोली लगी
