सरकार अमीरों से गठबंधन कर, किसानो की कृषि भूमि को लुटवा रही है...हमारे गाँवों की कहानी

रायगढ़ छत्तीसगढ़ से कन्हैयालाल पडिहारी बोल रहे हैं : कोलाहल से दूर खुशहाल किसान, खिलखिलाते बच्चे, सर पर मटकी लिए पनिहारिन, शुद्ध हवा, पानी, बरगद का पेड, पेड के नीचे ग्राम सभा...अब वो सब शहर में बदल रहा है जो दुखद है. आज के समय में सरकार अमीरों से गठबंधन कर, किसनो की कृषि भूमि को उद्योगों में बदल रही है और किसान उसके कुचक्र में फंसता जा रहा हैं, उनके जीवन जीने के साधनों को, रोजी रोटी को खत्म किया जा रहा है, हमारे द्वारा चुना गया हमारा प्रतिनिधि हमारा शोषक हो जाता है, और असहाय किसान उस पर कोई आवाज नही उठा पाता, यदि कोशिश भी करता है तो उन्हें प्रताड़ना सहना पड़ता है जो किसान जनता का दुर्भाग्य है | कन्हैयालाल पडिहारी@9981622548.

Posted on: Mar 16, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI SONG VICTIMS REGISTER

गाय गोबर से बना लो अपना कंडा...कविता

तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडिहारी एक कविता सुना रहे हैं :
गाय गोबर से बना लो अपना कंडा-
गरम कर लो अपना हंडा, जो भी हो तुम्हारा ठंडा-
मन हो जायेगा चंगा, गाय गोरु होते हैं कई रंग-
फिर भी चरते संग-संग नही मानते किसी को बदरंग-
जाते हैं संग-संग आते हैं संग-संग-
उनमे होती ही है अथाह प्रेम-नही करते किसी से खेम-
बछड़ा से करते है सभी प्रेम लूटा देते सभी प्रेम...

Posted on: Feb 28, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI SONG VICTIMS REGISTER

मोर हीरा भुइयां, मोर सोना भुइयां, मोर उपजाऊ भुइयां...किसान गीत

ग्राम-तमनार, जिला-रायगड़ (छत्तीसगढ) से कन्हैयालाल पडियारी धरती माता पर एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं :
मोर हीरा भुइयां, मोर सोना भुइयां, मोर उपजाऊ भुइयां – तै कहां पर आ गे – कागद के नोट खातिर, दलाल मन के चोट खातिर-
तै बेचा गे – तै मोला छोड़ कहा पर आ गे, तै हर छोटे कागद के नोट छोडी-
कवडी-कवडी खातिर मै लला गे – मोर उपजाऊ भुइयां छोड़ कहा पर आ गे –
तोर छाती मा चिमनी गाड़े, वहा ले करिया कुहिरा निकाले-
मोर छाती मा आरी चल गे – बिर्ला शासन प्रशासन के आखी मा खटके, मोर चोला ले तै लुटा गये-
मोर करेजा मा खंजर गडगे – मन-मन मा खोजत रह गये, तोला गुन -गुन रोवत रह गे – तोर छोड़े मा बैठ गये आंगर- जांगर-
मोर उपजाऊ भुईया छोड़ कहा पर आ गे...

Posted on: Sep 28, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI SONG VICTIMS REGISTER

नित-नित जीना, नित-नित मरना सबकी यही कहानी है...कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं:
नित-नित जीना, नित-नित मरना सबकी यही कहानी है-
ढोल मृदंग से सूर्य निकलता मै भी कभी अभिमानी था-
अब देखो मेरा बुरा हाल रोज तुम्ही से खूब पिटता हूँ-
पिटा-पिटाकर भी तुमसे तुम्हारा मन बहलाता हूँ-
तुम गाते हो सुर लगाकर मई भीतर-भीतर रोता हूँ-
मै भी था कभी तुम जैसा जिन्दा-
अब तो ढोल मृदंग कहलाता हूँ-
करो न गुमान तुम भी मुझ जैसा...

Posted on: Sep 15, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI SONG VICTIMS REGISTER

घमंड करने से होता है नुकसान...कहानी -

एक किसान की दो लड़की थी ,बड़ी बेटी चुरकी तथा छोटी बेटी घुरकी। एक दिन बड़ी बेटी बोली मामा के यहाँ जाना है, किसान ने कहा जाओ लड़की जाने लगी, चलते चलते एक भैस मिली जिसने कहा मुझे चारा दे दो लेकिन उसने नहीं दिया और चली गयी अपने मामा के यहाँ पहुची तो वहां पर उसे सभी ने अनदेखा कर दिया वह वापस घर चली आई. इसके बाद छोटी लड़की गयी. भैस ने उससे भी ऐसे ही कहा तो उसने भैस को चारा दिया और अपने मामा के यहाँ पहुची तो सभी ने उसे गले लगाया और खूब खिलाया- पिलाया कुछ दिनों में बाद वापस घर आई तो सभी से उसने बताया लेकिन बड़ी बहन को अच्छा नहीं लगा क्योकि उसके साथ ऐसा नहीं हुआ था इसलिए लोग कहते हैं कि कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए| कन्हैयालाल पडियारी@9981622548

Posted on: May 25, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI SONG VICTIMS REGISTER

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