"संकल्पित हो रही जवानी माँ की पीड़ा हरने को"...
सुरेश कुमार बड़वानी, मध्यप्रदेश से “संकल्पित हो रही है जवानी” के विषय में बता रहे हैं:-”संकल्पित हो रही जवानी माँ की पीड़ा हरने को, निकली संगठित करके दुष्ट व्यक्ति से लड़ने को, विश्व राष्ट्र व विश्व शांति का चिंतन जिसको खलता है, इन्हें विश्व बंधुत्व निभाता नफरथ का विष पलता है, जो आतंकवाद हानि वस्तुतः उन्हें कुचलने को, संकल्पित हो रही जवानी माँ की पीड़ा हरने को| कट्टरता नफरथ फैलाती है, भ्रष्टा मन्त्र रचाती है, समता ममता राष्ट्र भक्ति की चर्चा उजेला भाती है उसमें स्वार्थी अरुणावाद की कट्टरता से धरने को, संकल्पित हो रही जवानी माँ की पीड़ा हरने को, दुनिया पर हावी होने का चढ़ा हुआ जूनून जिनको, खून ख़राबा कट करने में दर्द नहीं होता जिनको, मचल उठी है उन्हें जवानी पैरों तले मसलने को, संकल्पित हो रही जवानी माँ की पीड़ा हरने को| प्राणी मात्र से प्यार निभाता निर्मल वस्तु बहाते हैं, अपनी स्वार्थ सिधी के खातिर अरे कहर बरसाते हैं, कफ़न बांधकर चली जवानी उन्हें दफ़न करने को, संकल्पित हो रही जवानी माँ की पीड़ा हरने को ||
Posted on: Oct 21, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER
हिंदी साहित्य काव्य : रस किसे कहते हैं?
संदीप कुमार कुशवाहा, ग्राम-धनहा, जिला-सीधी (मध्यप्रदेश) से रस किसे कहते हैं जिसे बता रहे है: किसी काव्य साहित्य को पढने, सुनने अथवा देखने से पाठक श्रोता अथवा दर्शकों को जो आनंद आता है उसे रस कहते हैं-
रस कहते है रस के चार अंग है-
1. स्थाई भाव| 2. विभाव|
3. अनुभाव| 4.संचारी भाव|
Posted on: Oct 20, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER
जाग नवजवान जाग संस्कृति पुकारती...
बड़वानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार एक कविता सुना रहे हैं| यदि आप ऐसे संदेश रिकॉर्ड करना चाहते हैं तो 08050068000 पर मिस्ड कॉल कर सकते हैं|
जाग नवजवान जाग संस्कृति पुकारती...(AR)
Posted on: Oct 18, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER
छड़ी दृष्टिबाधितों की दृष्टि है...कविता-
राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व छड़ी दिवस पर एक गीत सुना रहे हैं:
छड़ी दृष्टिबाधितों की दृष्टि है-
कैसी अद्भुत श्रृष्टि है-
एक छड़ी एसी है ओल्ड-
जो हो जाती है फोल्ड-
आ जाती है जेब में... (AR)
Posted on: Oct 15, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER
जंगल में रहता है एक चिड़िया एक चिड़िया भई एक चिड़िया...कविता-
परियोजना दरभा जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लक्ष्मी बाई कश्यप यह एक कविता सुना रही है-
जंगल में रहता है एक चिड़िया एक चिड़िया भई एक चिड़िया-
एक खाया फुर से पता नही किधर से-
जंगल में रहता है,दो चिड़िया दो चिड़िया भई दो चिड़िया-
एक खाया फुर से पता नही किधर से-
जंगल में रहता है,तीन चिड़िया तीन चिड़िया भई तीन चिड़िया
एक खाया फुर से पता नही किधर से-
जंगल में रहता है चार चिड़िया चार चिड़िया भई चार चिड़िया-
एक खाया फुर से पता नही किधर से-
अब पुरे पांच चिड़िया बच गये भई पांच चिड़िया बाख गये...RK
