वनांचल स्वर: मलेरिया बुखार का घरेलू उपचार-
ग्राम-मोदे, ब्लॉक-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से मनोज कुमार पटेल बताते हैं कि किस प्रकार मलेरिया के घरेलू उपचार में औषधियों का इस्तेमाल किया जाता है। उनके दादा, परदादा एवं पिता भी वैद्य रहे हैं। पटेल 2008 से लोगों का उपचार कर रहे हैं। जब गांवों में अस्पताल भी नहीं थे, तब से उनके पूर्वज मरीजों का उपचार कर रहे थे। इसी बात से प्रभावित होकर वह ख़ुद भी वैद्य बने। अस्पतालों के बनने से पहले गांव के लोग उपचार के लिए पूरी तरह वैद्य पर निर्भर थे। वह बताते हैं कि मलेरिया एवं आम बुखार के इलाज के लिए नीम एक उपयोगी औषधि है। पटेल यह काम आजीविका के लिए नहीं, अपितु सेवा भाव के कारण करते हैं। सम्पर्क@9479070321, 6568684544 (185676) GT
Posted on: Feb 18, 2021. Tags: CG KANKER MANOJ PATEL VANANCHAL SWARA
वनांचल स्वर: जंगल से चरोटा भाजी,कांदा कुलियारी भाजी चाटी भाजी खाने से लाभ होता है...
ग्राम-मोदे, ब्लॉक-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से मनोज कुमार पटेल बताते हैं कि जंगल में खाने की क्या-क्या भाजी मिलती है। बस्तर में चिरोंटा भाजी, हुलोलिया भाजी, बरचीकुटी भाजी, मूंगा भाजी, चाटी भाजी, तीनपनिया भाजी, कांदा भाजी, कुलियारी भाजी, पीकरी भाजी, कांटा भाजी, इत्यादि मिलती हैं। जिसमें से कुछ उगाई जाती हैं एवं कुछ जंगल से प्राप्त होती हैं। पटेल को लगता है कि आने वाले 10 सालों में कुलियारी भाजी विलुप्त हो जाएगी। चरोटा भाजी पाचनतंत्र और चर्बी घटाने के लिए काफी लाभदायक भाजी है।सम्पर्क 9479070321,6268684544.(185657) GT
Posted on: Feb 18, 2021. Tags: CG KANKER MANOJ PATEL VANANCHAL SWARA
नहीं तोसे रो बरसाना...गीत-
ग्राम-राजापुर, पोस्ट-लड्वारी, जिला-निमाड़ी (मध्यप्रदेश) से मनोज कुसवाहा एक गीत सुना रहे हैं:
नहीं तोसे रो बरसाना-
बो महिना अंदर में बीते-
महीना पालना मा झूले-
फूल से ये मुस्काने-
नहीं तो सिरों वही जाना... (AR)
Posted on: Jun 21, 2020. Tags: MANOJ KUSWAHA MP NIMARI SONG VICTIMS REGISTER
धान और मक्का की खेती करते हैं, वर्ष में लाख रुपये तक कमाई हो जाती है...
ग्राम-बांदे, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से मनोज पोटाई बता रहे हैं वे कृषक है, धान और मक्का की खेती करते हैं, मक्का की फसल तैयार होने में लगभग 5 माह का समय लगता है, 4 एक्कड़ भूमि पर मक्का लगाते हैं, इसके लिये पानी का साधन होना आवश्यक है और उनके पास इसके लिये बोर की सुविधा है, जिससे खेती कर पाते हैं, प्रतिवर्ष खेती करते हैं, लगभग 130 क्विंटल उपज प्राप्त करते हैं, जिसे व्यपारियों को बेचकर 40 हजार लागत लगाकर लगभग 1 लाख 20 हजार तक की कमाई हो जाती है, बाजार मूल्य पर लाभ तय होता है| (AR)
Posted on: Jun 19, 2020. Tags: CG KANKER MANOJ POTAI SONG STORY VICTIMS REGISTER
गर्मी के मौसम में टपके पसीना...कविता-
ग्राम-राजापुर, पोस्ट-लड़वारी, जिला-निमाड़ी (मध्यप्रदेश) से मनोज कुसवाहा एक कविता सुना रहे हैं:
गर्मी के मौसम में टपके पसीना-
धरती है प्यासी-
अम्बर है पानी बिना-
सुबह का मौषम मन को भाया-
संध्या के मौषम में दिल को रिझाया-
दोपरिहा के मौषम में सभी को दुखाया... (AR)
