दाई है मन मन में हासत है, दादा हर फेटफेटी ला उतारत है...छत्तीसगढ़ी कविता

तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहे है:
दाई है मन मन में हासत है, दादा हर फेटफेटी ला उतारत है-
दाई ला कहत है कर झट कोन, ये देख के बैला हरजावत है-
झट कुन जाबों तो झट कुन आबों, आते घरवा ला बैला ला घलो देखबो-
लोग लईका मन नानचुन, नानचुन हवे, उमन खात है संझा के झट कुन-
दादा के गोट ला सुनके दाई ह, खड़बढ़, सड़बढ़ बेनी मा बांध जात है रबर-
फेटफेटी में बैठ के दुनो कोई कैसन जावत है, देख तो बकाइ पहुँच गयें रायगढ़ शहर...

Posted on: Apr 14, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI SONG VICTIMS REGISTER

ओलिया कसन ठगत है, जोन हर बनथ है हमर सरकार...छत्तीसगढ़ी कविता

तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी एक छत्तीसगढ़ी में एक कविता सुना रहे है:
ओलिया कसन ठगत है, जोन हर बनथ है हमर सरकार-
नित्ता नित्ता उमन खात है, कमैय्या के जिन्दगी बेकार-
बैला कमाथ है, घुड़वा खात है, बैला के जीना हवे बेकार-
दिनभर नेहना तोड़ के बैलाहा पाएं खाये भर, भैरा रुखा सुखा-
और घोड़ा खाये दाने चबेना, खड़े खड़े मजा ले पोगराये-
वईसन हमर देश में हवे, ठगवा नित्ता नित्ता ला खाये-
और खेत खार में कमैय्या किसान, दाना दाना बर ललाय...

Posted on: Apr 09, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI SONG VICTIMS REGISTER

बीवी से डर लगता है, उसकी शेरनी जैसी गुर्राहट से, मै काँप जाता...व्यंग्य कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी एक व्यंग्य कविता सुना रहे है :
बीवी की फटकार से, चेहरा उतर गया-
बीवी की दहाड़ से मेरा, सारा बाल उखड़ गया-
मै डर से, खाट के नीचे, दुबक गया-
उसकी शेरनी जैसी गुर्राहट से, मैं काँप जाता-
जब वह झाड़ू लेकर चलती है तो,मै सहम कर रह जाता हूँ – उसकी पायल की झन्कार भी, हथौड़े जैसे लगती है-
उसकी चूड़ी की खनक भी, बन्दूक की गोली जैसे लगती है-
जब वह बल खाके चलती है तो, नागिन की चाल जैसा लगता है...

Posted on: Apr 08, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI SONG VICTIMS REGISTER

लम्बी नाक होती जिनकी, वो चीटी कहलाती है...कविता

तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी एक कविता सुना रहे है:
लम्बी नाक होती जिनकी वो चीटी कहलाती है-
घर के आसपास रहती वह बिल हमेशा बनाती रहती वह-
झट सूंघ लेती वह, मीठे पर हाथ मारती है वह-
हमेशा चलती रहती वह, पर्वतों पर चढ़ जाती है-
छोटी सी छेद को वह, लम्बी सुरंग बना डालती वह-
समूहों में ही रहकर वह, अपना काम करती है-
एकता में रहकर वह, हमें भी एकता के पाठ पढ़ाती है...

Posted on: Apr 07, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI SONG VICTIMS REGISTER

कौन गाँव में लईका रोईस, कौन गाँव में सयान...छत्तीसगढ़ी कविता

तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी छत्तीसगढ़ी भाषा में एक कविता सुना रहे है:
कौन गाँव में लईका रोईस, कौन गाँव में सयान-
तमनार ब्लॉक में जम्मो रोईस, कौन गरीब कौन किसान-
उर्रा धुर्रा मा खेत बिचाईस, जोन हर नी बिचाईस लगिस अधिग्रहण-
अब कैसे होई, हमर भरण पोषण, यहाँ वहा खोजे बर धरत है, कहा कहा का जिनिस-
आवत ज़ाही करत ज़ाही खनन, चिन्ता के विषय आगे है गहन-
एला सुनके लोग बाग, हो गए सनासन-
कहा जाबो किसे करबो, सोचे बर पड़ गिस, जम्मो ला कैसे बचाओं प्राण-
काला राकबो काला बेचबो, नहीं दीखते कोनो सामान...

Posted on: Mar 30, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI SONG VICTIMS REGISTER

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