लम्बी नाक होती जिनकी, वो चीटी कहलाती है...कविता
तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी एक कविता सुना रहे है:
लम्बी नाक होती जिनकी वो चीटी कहलाती है-
घर के आसपास रहती वह बिल हमेशा बनाती रहती वह-
झट सूंघ लेती वह, मीठे पर हाथ मारती है वह-
हमेशा चलती रहती वह, पर्वतों पर चढ़ जाती है-
छोटी सी छेद को वह, लम्बी सुरंग बना डालती वह-
समूहों में ही रहकर वह, अपना काम करती है-
एकता में रहकर वह, हमें भी एकता के पाठ पढ़ाती है...
