बीवी से डर लगता है, उसकी शेरनी जैसी गुर्राहट से, मै काँप जाता...व्यंग्य कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी एक व्यंग्य कविता सुना रहे है :
बीवी की फटकार से, चेहरा उतर गया-
बीवी की दहाड़ से मेरा, सारा बाल उखड़ गया-
मै डर से, खाट के नीचे, दुबक गया-
उसकी शेरनी जैसी गुर्राहट से, मैं काँप जाता-
जब वह झाड़ू लेकर चलती है तो,मै सहम कर रह जाता हूँ – उसकी पायल की झन्कार भी, हथौड़े जैसे लगती है-
उसकी चूड़ी की खनक भी, बन्दूक की गोली जैसे लगती है-
जब वह बल खाके चलती है तो, नागिन की चाल जैसा लगता है...
