बाप के मया महतारी के दुलार, तब आज हमरे दुनिया देखेन संसार...कविता-
ग्राम-देवरी, पोस्ट-चंदोरा, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलास सिंह पोया एक कविता सुना रहे हैं :
बाप के मया महतारी के दुलार-
तब आज हमरे दुनिया देखेन संसार-
दोना में बासी खवाईस, कटोरा में पानी पियाईस-
तब हमके सुग्घर पैदा करिस और गोदी में खिलाईस-
अंगुली पकड़ के रेंगना सिखाईस और पेशाब मैदान ला साफ करिस-
तब हमके दाऊ दाई मन आज दुनिया ला देखाईस...
Posted on: May 31, 2019. Tags: CG KAILASH SINGH POYA POEM PRATAPPUR SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
जय-जय शिव भोला सुबह-शाम जापों तोर नाम ला...भजन-
ग्राम-नीलकंठपुर, पंचायत-गोरगी, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से जगदेव प्रसाद पोया एक गीत सुना रहे हैं :
जय-जय शिव भोला सुबह-शाम जापों तोर नाम ला-
सुन ले अर्जी मोरो सुन ले विनती-
सुन ले मोरो पुकार, कर देना मोर उद्धार-
तोरे कृपा ले भोला अमृत पानी-
तोर कृपा रे भोला कोउ न जानी...
Posted on: May 30, 2019. Tags: CG JAGDEV PRASAD POYA PRATAPPUR SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
गंगा दशहरा में मेला लागे रे, झोला धरा चल दशहरा रे...गंगा दशहरा गीत-
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलास सिंह पोया एक सरगुजिहा गंगा दशहरा गीत सुना रहे हैं :
गंगा दशहरा में मेला लागे रे-
झोला धरा चल दशहरा रे-
संगी मारे दो लिटिया रे बी सारी जा-
गंगा दशहरा में मेला लागे रे-
झोला धरा चल दशहरा रे-
संगी मारे दो लिटिया रे बी सारी जा...
Posted on: May 29, 2019. Tags: CG KAILASH SINGH POYA SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
सुख गये है नदी नाला सुख गये तालवा पोखरी प्यासी हर मोला लागे...गीत
ग्राम-देवरी, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर, (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक गीत सुना रहे है:
हैय रे हाय प्यासी हर मोला लागे-
कैसे के टोरब तेंदू पान प्यासी हर मोला लागे-
घुटरा पतेरा देखा पखना गरम मारे प्यासी हर मोला लागे-
सुख गये है नदी नाला सुख गये तालवा पोखरी प्यासी हर मोला लागे-
बोतल के पानी हर गरम होई जाय प्यासी हर मोला लागे-
घुटरा पतेरा में साथी चढ़ावे रे प्यासी हर मोला लागे...
Posted on: May 28, 2019. Tags: CG KAILASHSINGH POYA PRATAPPUR SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
सीके सी लोटा पिसे बर हरदी एके परख...गंगा दशहरा गीत-
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलास सिंह पोया एक पारंपरिक गंगा दशहरा गीत सुना रहे हैं :
सीके सी लोटा पिसे बर हरदी एके परख-
यवा नरी मोर छता, तरी रे-
संगी छू लेना सारा जाबो नी-
चला-चला जी एके परख-
छुटे नरी छा तका तरी रे...
