सहकार रेडियो : बाल चौपाल (पटाखों की लड़ी)
बच्चों, बाल चौपाल में आज आप सुनेंगे कहानी “पटाखों की लड़ी” | इसे लिखा है सुकुमार राय ने| आवाज़ दी है मुंबई महाराष्ट्र से सतीश तनवानी ने| इस कार्यक्रम को 08050068000 पर मिस्ड कॉल कर सुन सकते हैं |
Posted on: Mar 12, 2021. Tags: BAL CHAUPAL SAHAKAR RADIO
बढ़ जाओ उस राह पर, जिस राह पर जाना है...कविता-
भोपाल, मध्यप्रदेश से सुनील सेन एक कविता सुना रहे हैं:
बढ़ जाओ उस राह पर-
जिस राह पर जाना है-
पकड़ लो उस हाँथ को-
जिसका सांथ निभाना है-
मंजिल तुम्हारी दूर नहीं,
तुम आसानी से पहुंच जाओगे... (AR)
Posted on: Mar 10, 2021. Tags: BHOPAL MP POEM SUNIL SEN
सहकार रेडियो : बाल चौपाल (आलसी तिम्मा)
बच्चों, बाल चौपाल में आज आप सुनेंगे कहानी “आलसी तिम्मा” | इसे लिखा है एम आर शिवशंकर जी ने| इस कार्यक्रम को 08050068000 पर मिस्ड कॉल कर सुन सकते हैं |
Posted on: Mar 07, 2021. Tags: BAL CHAUPAL SAHAKAR RADIO
लोहातर सोनादाई कंडरा राजा की कहानी...
ग्राम-बांगाचार, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से वेदबती छुरपाल अपने गाँव कि लोहातर सोनादाई के बारे में बता रही है, उनके गाँव में पूर्वजों के समय एक राजा कंडरा रहता था, राजा के पास घुडसवार, गाय, बकरी चराने वाले सैनिक रहते थे| बकरी चराने वाला रोज बकरी चराकर लाता था, एक दिन बकरी चराने वाला जंगल गया| बकरी चराते-चराते थक गया और एक पेड़ के नीचे जाकर बैठ गया| जिस पेड़ के नीचे वह बैठा था, वह सोने का पेड़ था| उसे पेड़ के पत्ते अच्छे लगे उसने सभी बकरियों के कान में पत्ते पहना दिए और शाम हो गयी, वो सभी बकरियों को राजा के पास ले गया और अपने घर चला गया| राजा ने देखा बकरियों के कान में पत्ते चमक रहे थे, राजा ने तुरंत बकरी चराने वाले को बुलावा भेजा| बकरी चराने वाला डरते हुए, राजा के पास आया| राजा ने पूछा कि आपने ये पत्ते बकरी के कान में क्यों पहनाये हैं| बकरी चराने वाला बोला राजा जी ये पत्ते मुझे अच्छे लगे तो मैंने पहना दिए, दुसरे दिन सुबह-सुबह घुडसवार तैयार किये और उस सोने के पेड़ की खोज में निकल गए| उस पेड़ तक पहुँचते पहुँचते शाम हो गयी और पेड़ जमीन के अंदर धसते गया, तो राजा ने उस पहाड़ को खोदने के बारे में सोचा और श्रमिक बुलाये पहाड़ को खोदना शुरू कर दिए| पहाड़ को खोदने पर पानी निकला, इताना पानी निकला की उस पहाड़ को जितने श्रमिक खोद रहे थे, सभी पानी में बह गए और साथ में राजा भी बह गया| बाहर रानी थी, वह भी बह गयी, सोने का पेड़ था| वो पेड़ अभी भी जीवित है, उस झरने में जब मछली या जीव जन्तु उस सोने से टकराते हैं तो सोना बहार आ जाता है और सोनझरिया लोग इसी सोना को खोजते हैं और बेचते हैं और अपना जीवन यापन करते हैं|(RM)
Posted on: Feb 28, 2021. Tags: CG CULTRAL STORY KANKER VEDBATI CHURPAL
ख़त लिख दूँ भागवान तुझे गर सही पता लग जाये मुझे...भजन-
मानिकपुर से राम गोपाल भजन सुना रहे हैं:
कोई साधू संत ब्राम्हण बैरागी-
ऋषि मुनि बत लाये तुझे-
ख़त लिख दूँ भागवान तुझे गर –
सही पता लग जाये मुझे-
श्री गणेशाय प्रथम लिखूं और-
सिद्ध श्री सुख धाम लिखूं-
कमला पति और गौरा पति सीता पति श्री राम लिखूं...(AR)
