वनांचल स्वर : भुई आंवला से पीलिया का उपचार

रायपुर (छत्तीसगढ़) से वैद्य एच डी गाँधी आज पीलिया के उपचार बता रहे है, भुई आंवला का पौधा होता है उसकी पत्तियां इमली की पत्ती और आंवला की पत्ती जैसी होती है और उसमे छोटे-छोटे आंवला जैसे फल लगते है और ये बारिश के मौसम से लेकर ठंडी के मौसम तक रहते है इसका पंचांग फल फूल पत्ती जड़ तना सबको मिलाकर के साफ धो लेवे और उसको सुखा लेवे और पीसकर चूर्ण बना लेवे और चूर्ण के एक गिलास दूध में एक चम्मच डालकर उबाल ले और सुबह खाली पेट ठंडा होने पर बिना मीठा मिलाकर सादा नित सेवन करें उससे एक सप्ताह में पीलिया ठीक हो सकता है| परहेज मिर्च, मसाला, तेल खटाई, गरिष्ट भोजन का उपयोग न करें. एच डी गाँधी@9111061399.

Posted on: Feb 20, 2018. Tags: HD GANDHI SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER

वनांचल स्वर : इमली कम है इसलिए इसका प्रयोग सब्जी बनाने में करते है बेच नहीं पाते हैं...

सीजीनेट जन पत्रकारिता जागरूकता यात्रा आज ग्राम-चारगाँव, पंचायत-भारवी, ब्लाक-भानुप्रतापपुर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) में पहुँची है वहां बाबूलाल नेटी की मुलाक़ात गाँव के राजेश कुमेटी से हुई है जो उन्हें इमली के बारे में बता रहे है उनका कहना है कि इमली के पेड़ उनके घरो में ही मिल जाती है पर उनके आसपास के जंगलो में आजकल इमली के पेड़ बहुत कम है. इमली का प्रयोग लोग खटाई बनाने में या सब्जी बनाने में करते है पर आजकल उत्पादन कम है इसलिए उसे घर में ही खाते है और उसको वे लोग नहीं बेचते है. अधिक जानकारी के लिए राजेश कुमेटी@7089052402.

Posted on: Feb 03, 2018. Tags: RAJESH KUMETI SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER

वनांचल स्वर: जंगल से मिलने वाले महुआ, बेलवा, हर्रा, लाख बहुत सस्ते दामो में बेच देते है...

रामेश्वर कुमरा (सरपंच) ग्राम-अमोड़ी, ब्लाक-दुर्गकोंदल, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से बता रहे है कि उनके गाँव के आसपास जंगल है उनसे उनको महुआ, तेंदू, लाख, कोशुम, सरई, बेलवा, हर्रा आदि मिलते है और लाख को साल में दो बार तोडा जाता है जून और दिसंबर माह में और उनको दुर्गकोंदल बाजार में ले जाकर बेच देते है, लाख को 200 रूपये किलो और महुआ को 15-20 रूपये किलो बेचते है और बेलवा और तेंदू बिक्री भी करते है और वे लोग लाख का बीज नहीं लाते है पेड़ से ही उत्पन होता है| महुआ, तेंदू, लाख, सरई, बेलवा, हर्रा को दुर्गकोंदल बाजार में सस्ते दामो में बेच देते है और अधिक जानकारी के लिए संपर्क@9294651617.

Posted on: Jan 26, 2018. Tags: RAMESHWAR KUMARA SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER

वनांचल स्वर: जमीन पथरीली है तो फसल अच्छी नहीं होती, हम वन पर ही अधिक निर्भर हैं...

ग्राम-हिल्चुर, पंचायत-दमकसा, ब्लाक-दुर्गकोंदल, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से टेमाराम बता रहे है कि वे लोग जंगल के किनारे रहते है और जंगल से महुआ का उत्पादन करते है और उसको बाजार में ले जाकर बेचते है और उससे साबुन, सोडा, दाल चावल खरीदकर अपना जीवन यापन करते है और उसके आलावा चार, बेलवा, तेंदू, लाख भी होता है लाख की कीमत लगभग 100-120 रूपये तक है उनके यहाँ पर चट्टान होने के कारण धान की खेती नहीं कर पाते है उनके यहाँ बारिश के समय सिर्फ एक ही फसल होती है| उसके आलावा कोई दूसरी फसल नहीं होती है और वे लोग ज्यादातर जंगल के ऊपर निर्भर रहते है. बाबूलाल नेटी@9713997981.

Posted on: Jan 24, 2018. Tags: SONG TEMAARAM DADURAM UIKA VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER

वनांचल स्वर : पीपल के पौधे से होने वाले लाभ -

पीपल का पेड़ बहुत विशाल होता है, चैत बैशाख माह में उसकी नये कोपले और नये पत्ते निकलते है| आदिवासी समाज के लोग उसके नये कोमल पत्तो को पकाकर भाजी या सब्जी खाते है पीपल भाजी से कसैलापन को निकालने के लिए पकाने से पहले उबालने पानी फेक देते है फिर उसे आम या अन्य कटाई डालकर स्वाद के अनुसार नमक मिर्च और अन्य मसाला डालकर सुखाते है पीपर भाजी को पेज रोटी और चावल के साथ खाते है| पीपर का फल माघ महीना में पकता है तब पीपर पाका को बैगा आदिवासी बच्चे बड़े मजे के साथ खाते है| उस फल को हारिल, फलकी, सुआ, गलगल, गलेया, घेंगा, चिड़िया भी बहुत खाते है| पीपर के दूध से बैगा बच्चे एक तरह से गोंद का बनाकर चिड़िया पकड़ने का काम भी करते है| पीपर भाजी की तासीर ठन्डी होती है पीपर भाजी खाने से शरीर ठंडा रहता है| पतला दस्त होने से पीपर भाजी खिलाते है| उससे दस्त रुक जाता है शीत के कारण होने वाली खुजली पीपर भाजी खिलाने से ठीक हो जाती है| पीपर भाजी को सुखाकर घर में सुरक्षित रखते है अगर बारिश के मौसम अचानक दस्त हो तो पीपर को चावल के पसिया का साथ बनाकर खिलाते है उससे दस्त रुक जाता है पीपर हमारे लिए वरदान है उसकी रक्षा करनी चाहिए उसकी पूजा भी की जाती है. बाबूलाल नेटी@9713997981.

Posted on: Jan 23, 2018. Tags: BABULAL NETI SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER

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