वनांचल स्वर : पीपल के पौधे से होने वाले लाभ -
पीपल का पेड़ बहुत विशाल होता है, चैत बैशाख माह में उसकी नये कोपले और नये पत्ते निकलते है| आदिवासी समाज के लोग उसके नये कोमल पत्तो को पकाकर भाजी या सब्जी खाते है पीपल भाजी से कसैलापन को निकालने के लिए पकाने से पहले उबालने पानी फेक देते है फिर उसे आम या अन्य कटाई डालकर स्वाद के अनुसार नमक मिर्च और अन्य मसाला डालकर सुखाते है पीपर भाजी को पेज रोटी और चावल के साथ खाते है| पीपर का फल माघ महीना में पकता है तब पीपर पाका को बैगा आदिवासी बच्चे बड़े मजे के साथ खाते है| उस फल को हारिल, फलकी, सुआ, गलगल, गलेया, घेंगा, चिड़िया भी बहुत खाते है| पीपर के दूध से बैगा बच्चे एक तरह से गोंद का बनाकर चिड़िया पकड़ने का काम भी करते है| पीपर भाजी की तासीर ठन्डी होती है पीपर भाजी खाने से शरीर ठंडा रहता है| पतला दस्त होने से पीपर भाजी खिलाते है| उससे दस्त रुक जाता है शीत के कारण होने वाली खुजली पीपर भाजी खिलाने से ठीक हो जाती है| पीपर भाजी को सुखाकर घर में सुरक्षित रखते है अगर बारिश के मौसम अचानक दस्त हो तो पीपर को चावल के पसिया का साथ बनाकर खिलाते है उससे दस्त रुक जाता है पीपर हमारे लिए वरदान है उसकी रक्षा करनी चाहिए उसकी पूजा भी की जाती है. बाबूलाल नेटी@9713997981.
