दिमाग के बत्ती है दादा हीरा, बुद्धि के बत्ती है ना...गोंडवाना गीत
ग्राम पंचायत-कटरा, ब्लाक-मरवाही, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से पतराज सिंह मरकाम गोंडवाना के नेता हीरा सिंह मरकाम पर एक गीत सुन रहे है:
दिमाग के बत्ती है दादा हीरा बुद्धि के बत्ती है ना-
जय सेवा बड़ा देवा मंत्र सिखा दिए रे-
भाई-भाई एक डाकू एक कसाई-
गोंडवाना देवा एकर सफाई-
दिमाग के बत्ती है दादा हीरा बुद्धि के बत्ती है ना...
Posted on: Jul 09, 2018. Tags: PATRAJ SINGH MARKAM SONG VICTIMS REGISTER
चोली रिलो रिरिलो चोली रिलोयो रिलो...गोंडी शादी गीत
ग्राम-गुन्दुल, पोस्ट-पानीडोबीर, विकासखंड-कोयलीबेडा, तहसील-पखांजूर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से रमा कडियम एक गोंडी गीत सुना रही है, इस गीत को शादी के समय गाया जाता है:
चोली रिलो रिरिलो चोली रिलोयो रिलो-
तेदा रा दुला नीके बलाह हुस्कल रा दुला-
नीके लजा वायो रा ये दादा दुला-
नीके लजा वायो रा ये दादा दुला-
चोली रिलो रिरिलो चोली रिलोयो रिलो-
चोली रिलो रिरिलो चोली रिलोयो रिलो-
लयन तता वतोंन रा ये दादा दुला-
लयन तता वतोंन रा ये दादा दुला-
मंडा हुडी वतीन डा ये दादा दुला...
Posted on: Jul 09, 2018. Tags: GONDI SONG RMA KADIYAM
औषधीय पौधा चितावर के नाम पर पड़ा हमारे गांव का नाम चितरपुर...एक गाँव की कहानी-
ग्राम-चितरपुर, पंचायत-कातिम, प्रखण्ड-चैनपुर, जिला-गुमला (झारखण्ड) से ग्रामवासी बर्थलोमी लकरा बता रहे हैं, उनके गांव में एक पौधा होता था, जिसे चितावर के नाम से जानते हैं, जो पूरे गांव में मिलता था, उसी के नाम पर गांव का नाम चितरपुर पड़ा, ये पौधा केवल गांव में ही पाया जाता है, उसे दवा के लिए भी उपयोग करते हैं, लेकिन अब उस पौधे की संख्या कम हो गई है, लोग पौधों को काटकर खेत बना चुके हैं, ये जानकारी उन्हें अपने पूर्वजो द्वारा लिखी किताब से मिली, वर्तमान में गांव में 107 घर है, इस प्रकार से चितरपुर गांव का नाम एक औषधीय पौधा चितावर के नाम पर पड़ा और आज भी इसी नाम से जाना जाता है |
Posted on: Jul 09, 2018. Tags: BASTIRAM NAGWANSI SONG VICTIMS REGISTER
तोता और मैना की कहानी (गोंडी भाषा में)
ग्राम- गुन्दुल, पोस्ट-पानीडोबरी, विकासखंड-कोयलीबेडा, तहसील-पखांजूर जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से रमा कडियम गोंडी भाषा में एक कहानी बता रही है. कहानी इस प्रकार है: एक पिंजरे में बंद तोता से मैना बोली आप बहुत मजे में रहते हो| बैठे-बैठे अच्छा-अच्छा खाना मिलता है. बहुत बढ़िया पानी भी मिलता है| काश मुझे भी ऐसी पिंजरे की जिंदगी मिल जाती मुझे तो दिन रात भोजन और पानी के लिए भटकना पड़ता है तब कही अन्नकण अपने पल्ले पड़ते है| आप चाहते है की पिंजरे की जिन्दगी मिले तो ठीक है आ जाओ पिंजरे में मै जाता हूँ वन में ऐसे कहकर तोता जंगल में उड़ गया |
Posted on: Jul 09, 2018. Tags: GONDI KAHANI RMA KADIYAM
चिरई बनो मा, चिरई बोले रे...छत्तीसगढ़ी गीत
ग्राम-कोट्या, जिला-सरगुजा (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक छत्तीसगढ़ी गीत
सुना रहे हैं :
चिरई बनो मा चिरई बोले रे-
चिरई बनो मा चिरई बोले रे – अभी चुके दिन टरगे,हमर देश के-
चिरई बनो मा चिरई बोले रे-
कंचा बोरी बांस होंगे होवथे होशियार-
तोला मिल जाही भैया रोजो रोजगार-
चिरई बनो मा चिरई बोले रे-
अभी चुके दिन टरगे,हमर देश के-
चिरई बनो मा चिरई बोले रे...

