ओस की बूँद-सी होती है बेटियां...प्रेरणादायक विचार-

सुरेश कुमार बड़वानी, मध्यप्रदेश से बेटियों के लिए कुछ लाइने सुना रहे हैं -”ओस की बूँद सी होती है बेटियां, फर्श खुरदुरा हो तो रोती है बेटियां, रोशन करेगा बेटा तो बस एक ही कुल को दो-दो कुलों की लाज को ढोती है बेटियां, हीरा है अगर बेटा तो मोती है बेटियां औरों के लिए फूल ही बोती है बेटियां, मिट्टी में मर-नीर सी होती है बेटियां, घर की शान होती है बेटियां, माँ-बहन, पत्नी का फ़र्ज निभाती है बेटियां, इस कुल को आगे बढाती है बेटियां, सोना है अगर बेटा तो चांदी है बेटियां,बेटे को अच्छा खाना खिलाते हैं तो बेटियों को जूठन, बेटियां हो तो गृहस्थी को सजाती है, बेटियां हो तो दूसरों के आँगन की लाज बन जाती है, ओस की बूँद सी होती है बेटियां, इस फर्श खुरदुरा हो तो रोती है बेटियां”|

Posted on: Mar 16, 2021. Tags: BADWANI MP POEM SURESH KUMAR

नानी खाई लाल अनार चुसे...कविता-

अनमोल कुमार चंद्राकार जिला रायपुर कविता सुना रहे है :
नानी खाई लाल अनार चुसे-
आम रस पक रस दार लड़की
गाती बड्या गाना राकेशरोता-
सुनते नाना मोनू का चल रहा
हे जहाज कमल खिले शिगर रस...(181038)

Posted on: Mar 16, 2021. Tags: ANMOL KUMAR CG POEM RAIPUR

मीठी बोली सुनना है तो आना मेरे गाँव...कविता-

ग्राम-पपरौडी,जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से सागर राठौर एक कविता सुना रहे हैं:
कोयल बोले कुहू-कुहू बिल्ली बोले म्याऊ- ​
मीठी बोली सुनना है-
तो आना मेरे गाँव-
बंदर कूदे डाली-डाली-
बरगद देता छाँव-
शुद्ध हवा पाना है तो आना मेरे गाँव...(AR)

Posted on: Mar 15, 2021. Tags: ANUPPUR MP POEM SAGAR RATHAUR

खड़ा हिमालय बता रहा है...गीत-

सीजीनेट श्रोता किशननंद विसकर्मा एक कविता सुना रहे हैं:
खड़ा हिमालय बता रहा है-
डरो न आंधी पानी से-
खड़े रहो तुम अचल होकर-
सब संकट तूफानी में-
जीवन अपने पहाड़ से तुम-
सब कुछ पा सकते हो प्यारे...

Posted on: Mar 15, 2021. Tags: KISHAN VISKARMA POEM

अभिलाषा के विध्या के शिक्षा का सुविचारो से...कविता-

जिला-राजनदगावं (छत्तीसगढ़) से वीरेन्द्र गन्धर्व कविता सुना रहे है:
वीरेन्द्र गंद्रव नाम हमारा-
राजनादागावं गावं हमारा-
अभिलाषा के विध्या के-
शिक्षा का सुविचारो से-
हमें वितरक है-
लो ख़ुशी दो ख़ुशी-
तो खुशनुमा होगी जिन्दगी-
किले जितने वाले मिट जाते है-
दिल जितने वाले सदा याद किये जाते है...

Posted on: Mar 13, 2021. Tags: CG POEM RAJNANDGAON VIRENDRA GANDHARV

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