घाम-घाम में चुवे पसीना, पानी नहीं मिलाय...कविता-
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया गर्मी में होने वाली पानी की समस्या पर एक कविता सुना रहे हैं:
घाम-घाम में चुवे पसीना, पानी नहीं मिलाय-
कलप-कलप के जिव अपन लगे हे तरसाय-
नाला सूखे कुआ सूखे सूख गये फूटबाल-
तालाब पोखर सब सूखे नई दिसे घर दुआर-
घाम-घाम में चुवे पसीना, पानी नहीं मिलाय-
कलप-कलप के जिव अपन लगे हे तरसाय...
Posted on: Apr 03, 2019. Tags: CG KAILASH SINGH POYA POEM SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
हांथी आये थपक थप, पूंछी ला सपटाय के...कविता-
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलास पोया एक कविता सुना रहे हैं :
हांथी आये थपक थप, पूंछी ला सपटाय के-
पानी खीचे सोंढ में, आंखी ला मटकाय के-
सूपा जैसे कान हवे, देखे सीधे जाय के-
बार बोकला खाथे येहर, गेडा ला चटकाय के-
चर-चर महूत करथे, अंकुस ला गड़ाय के-
हमन ला घुमाय पीठ मा बैठाय के...
Posted on: Apr 03, 2019. Tags: CG KAILASH POYA POEM SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
वर्षा धूप करे धुआंधार, महुआ गिरे टूप टाप...कविता-
ग्राम-देवरी, थाना-चंदोरा, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक कविता सुना रहे हैं :
वर्षा धूप करे धुआंधार, महुआ गिरे टूप टाप-
झर-झर पानी आये, महुआ ले गिरे परे जाये-
हवा बहर से महुआ कर फुटी-
एमेले बहुत प्रभाव पड़े-
महुआ बढ़िया ले नई गिरे...
Posted on: Apr 02, 2019. Tags: CG KAILASH POYA POEM SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
दो बिल्ली एक रोटी लाई, पर दो टुकड़े कर नहीं पाई...कविता-
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक कविता सुना रहे हैं :
दो बिल्ली एक रोटी लाई, पर दो टुकड़े कर नहीं पाई-
बंदर एक वहां पर आया, दोनों को उसने समझाया-
लड़ना छोड़ राजीव तराजू लाई, तौल बराबर रोटी खाओ-
बिल्ली दौड़ तराजू लाई, लगा तौलने बंदर भाई-
भारी पकड़े से कुछ टुकड़ा डाला-
डालने अपने मुख डाला-
बंदर सब रोटी खाई, बिल्ली बैठ रही ललचाई...
Posted on: Mar 31, 2019. Tags: CG KAILASH SINGH POYA POEM SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
फूलों से नित हँसना सीखो, भौंरों से नित गाना...कविता-
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक कविता सुना रहे हैं :
फूलों से नित हँसना सीखो, भौंरों से नित गाना-
तरु की झुकी डालियों से नित सीखो शीश झुकाना-
सीख हवा के झोंकों से लो कोमल भाव बहाना-
दूध तथा पानी से सीखो मिलना और मिलाना-
सूरज की किरणों से सीखो जगना और जगाना-
लता और पेड़ों से सीखो सबको गले लगाना-
मछली से सीखो स्वदेश के लिए तड़पकर मरना...
