दो बिल्ली एक रोटी लाई, पर दो टुकड़े कर नहीं पाई...कविता-
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक कविता सुना रहे हैं :
दो बिल्ली एक रोटी लाई, पर दो टुकड़े कर नहीं पाई-
बंदर एक वहां पर आया, दोनों को उसने समझाया-
लड़ना छोड़ राजीव तराजू लाई, तौल बराबर रोटी खाओ-
बिल्ली दौड़ तराजू लाई, लगा तौलने बंदर भाई-
भारी पकड़े से कुछ टुकड़ा डाला-
डालने अपने मुख डाला-
बंदर सब रोटी खाई, बिल्ली बैठ रही ललचाई...
