परदेसिया के नारी सदा सुखिया परदेसिया...होली गीत-
ग्राम-मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक होली गीत सुना रहे हैं:
परदेसिया के नारी सदा सुखिया परदेसिया-
चार महिना के गर्मी लगत है-
कहिया ला सूत के डोलके बेनिया-
चार महीना बूंद परत है-
कहिया न सूत के खेला के बंगला-
चार महीना जार लगत है...
Posted on: Aug 22, 2019. Tags: BIHAR MUZAFFARPUR SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
करने को सवांद बहुत है, भरने को उन्माद बहुत है...गज़ल-
ग्राम-मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर(बिहार) से सुनील कुमार कवि महेश कटारे सुगम जी की एक गजल सुना रहे हैं :
करने को सवांद बहुत है, भरने को उन्माद बहुत है-
जीवन ये बोझिल करने को दुःख के पानी खाद बहुत हैं-
बिना जरूरत कुछ लोगो पर बड़े-बड़े परसाद बहुत है-
न्याय बना है मृग-मरीचिका करने को फरियाद बहुत है-
आम आदमी के जीवन में भरे हुए अवसाद बहुत है-
दुःख-दर्दों की भीड़-भाड में जीने का अलहाद बहुत है-
इन्कलाब जब तक ना आये अपने जिंदाबाद बहुत है-
करने को सवांद बहुत है, भरने को उन्माद बहुत है...
Posted on: Aug 21, 2019. Tags: BIHAR MUZAFFARPUR SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
भोलेनाथ आ गये शंभुनाथ आ गये...गीत-
ग्राम-साहपुर, पोस्ट-त्योथर, थाना-सोहागी, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से विनीत कुमार यादव एक भजन गीत सुना रहे हैं :
काशीनाथ आ गये भोलेनाथ आ गये-
भक्तों के कष्ट मिटाने वाले आ गये-
अब तो भाग्य खुलेंगे बिगड़ी बनेगी-
गौरा मिलेंगी और शंकर मिलेंगे-
भोलेनाथ आ गये शंभुनाथ आ गये...
Posted on: Aug 21, 2019. Tags: MP REWA SONG VICTIMS REGISTER VINIT KUMAR YADAV
भारत माता के बेटे हम चलते सीना तान के...कविता-
छिंदगढ़, जिला-सुकमा (छत्तीसगढ़) से मनीश कुमार कुंजामी एक देश भक्ति कविता सुना रहे हैं :
भारत माता के बेटे हम चलते सीना तान के-
धर्म अलग हो जाती अलग हो-
वर्ग अलग हो भाषा एक-
पर्वत, सागर, तट, वन मरुस्थल से हम आये-
फ़ौज वर्दी में हम सबसे पहले हिंदुस्तान के-
भारत माता के बेटे हम चलते सीना तान के...
Posted on: Aug 20, 2019. Tags: CG MANISH KUMAR POEM SONG SUKAMA VICTIMS REGISTER
सावन बरसे भादों गरजे बहे पुरवैया... बारामासा गीत
परावपोखर, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से रम्भा देवी से एक बारामासी गीत सुना रही हैं :
सावन बरसे भादों गरजे बहे पुरवैया-
सखी सब झूला झुलाला-
पिया बिन कछु न सुहाला-
द्वारा के संगे हम गईनी बजरिया-
झुमका-बेशहानी गिननी चुनरिया-
पहिने से जिया घबडाला-
गावं के पछि मा एक टूठी रे पिपरवा-
वई पर बईठ कववा सगुनिया-
सगुन के बोलिया सुनाला-
पिया मोर चिठिया पठाला-
रतिया के ट्रेन से पिया मोर अवथिन-
खोलथिन केवरिया जिया देरावथिन-
पिया मोरा आज मोरा सबकुछ सुहाला-
सावन बरसे भादों गरजे बहे पुरवैया...
