ये पुस्तक कापी ही शैतान हो गये हैं...व्यंग्य
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैया लाल पडियारी व्यंग्य कविता सुना रहे हैं:
मम्मी- बेटा शैतानी छोड़ दो और पढाई-लिखाई में ध्यान दो-
बेटा- मम्मी मै शैतानी कहां करता हूँ, ये पुस्तक कापी ही शैतान हो गये हैं चैन से रहने नही देते-
मम्मी- बेटा पढ़-लिखकर क्या बनोगे-
बेटा- मम्मी मै पढ़-लिखकर नेता बनूंगा-
मम्मी- बेटा नेता तो देश बेच डालते हैं
बेटा- मम्मी मै तो सब कुछ बेच डालूँगा यहां तक की अपने घर-द्वार सब बेच दूंगा और विदेश चला जाउंगा-
मम्मी- बेटा तो हम कहां रहेंगे-
बेटा- जहां सब कोई रहते हैं वही रह लेना-
मम्मी- बेटा वहां फिटिर-फिटिर बहत होता है-
बेटा- मम्मी आप भी तो ज्यादा फिटिर-फिटिर करते हैं, एक घडी चैन से रहने नही देते...
Posted on: Sep 03, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
गरीब मीलों पैदल चलता है भोजन पाने के लिए,अमीर मीलों चलता है उसे पचाने के लिए...कविता
ग्राम-बटई, पोस्ट-रेवटी, तहसील-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से दुर्गेश पटेल एक कविता सुना रहे हैं :
किसी के पास खाने के लिए-
एक वक्त की रोटी नही-
किसी के पास एक रोटी खाने के लिए वक्त नही-
कोई अपनों के लिए, अपनी रोटी छोड़ देता हैं-
कोई रोटी के लिए अपनों को छोड़ देता है-
दौलत बचाने के लिए सेहत खो देता हैं...
Posted on: Sep 02, 2018. Tags: CG DURGESH PATEL POEM SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
फूलों से नित हँसना सीखो, भौंरों से नित गाना...कविता
ग्राम-सिंगपुर, तहसील-पंडरिया, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से प्राथमिक विद्यालय की छात्रा श्वेता मरकाम एक कविता सुना रही हैं:
फूलों से नित हँसना सीखो, भौंरों से नित गाना-
तरु की झुकी डालियों से नित सीखो शीश झुकाना-
सीख हवा के झोंकों से लो कोमल भाव बहाना-
दूध तथा पानी से सीखो मिलना और मिलाना-
सूरज की किरणों से सीखो जगना और जगाना-
लता और पेड़ों से सीखो सबको गले लगाना-
मछली से सीखो स्वदेश के लिए तड़पकर मरना-
पतझड़ के पेड़ों से सीखो दुख में धीरज धरना...
Posted on: Sep 01, 2018. Tags: CG KABIRDHAM POEM SHVETA MARKAM SONG VICTIMS REGISTER
आवाज़ पेड़ों की...प्रकृति कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे है:
पेड़ों की झुरमुटों से आती है पैगाम-
मै शान्ति की प्रतीक हूँ-
मुझसे ही तो माँ-
मुझसे तुम हो, तुमसे मैं नहीं-
मै तो प्राकृति की देन हूँ-
पवन मुझे सुलाती है, पवन हमे उठाती है-
पवन की झोकों से बिखर कर अपने आप उग आती हूँ...
Posted on: Sep 01, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
फिर देश को बचाने वाले कौन महापुरुष आएंगे...व्यंग्य कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैया लाल पडियारी एक व्यंग्य कविता सुना रहे हैं:
देशवासियों पकौड़ा छानो-
खाने वाले ग्राहक न मिले तो कुत्तों को खिलाना-
कुत्ता भी न खाए तो पशुओं को खिलाना-
पशु भी न खाए तो नेताओं को खिलना-
नेता भी न खाए तो विदेशियों को बुलाना-
विदेशी को पकौड़ा खाते-खाते देश को खा जायेंगे-
फिर देश को बचाने वाले कौन महापुरुष आएंगे-
बड़ी मुश्किलों से आजादी मिली है-
आजादी के बेडी से ऊब गये हो तो-
स्वतन्त्रता की बेडी पहनो-
मेरे देश वासियों पकौड़ा छानो...

